गर्मी के मौसम बार-बार प्यास लगना, पसीना आना या थकावट महसूस करना अाम बात है। ऐसे में बच्चों व बड़ों को पानी या जूस के जरिए शरीर में तरल की मात्रा बनाए रखने की सलाह दी जाती है। कई आहार विशेषज्ञों की मानें तो जूस सेहत के लिए फायदेमंद तो हैं लेकिन पूर्णत: नहीं। जानें इसके कारणों को-
सुस्त पाचन प्रणाली
पाचन प्रणाली पहले से कटे फल और सब्जियों या तरल रूप में पदार्थों को प्राप्त करने की आदी हो जाती है जो इस प्रणाली को सुस्त करता है। साधारण ठोस आहार से हार्मोनल स्त्राव का प्रभाव घटने लगता है।
फाइबर की कमी
ज्यादातर फल, सब्जियों व अनाजों में फाइबर होता है जो पोषक आहार का अहम हिस्सा है। यही रोगों से बचाव कर लंबे समय तक ऊर्जावान रखता है। फलों-सब्जियों को तरल या जूस के रूप में लेने पर इनके फायदेमंद फाइबर बाहर ही रह जाते हैं। ऐसे में बिना फाइबर वाला जूस पीने से ज्यादा फायदा नहीं होता।
जल्दी लगती भूख
शरीर ठोस आहार के मुकाबले तरल को जल्द प्रोसेस कर लेता है। उदाहरण के तौर पर एक सेब को खाने पर पचने में एक पूरी प्रक्रिया काम करती है। मुंह इसे टुकड़ों में बांटता है, पेट के एंजाइम्स इसे पचाते हैं। जूस के कारण यह पूरी प्रक्रिया तेजी से काम करती है जिससे अगले भोजन की अवधि घट जाती है और व्यक्ति को दोबारा भूख का अहसास होता है।
ऐसे मिलेगा फायदा
- फलों के मुकाबले सब्जियों के जूस ज्यादा अच्छे हैं। यदि आप भोजन में ज्यादा सब्जियां नहीं ले पाते तो कई सब्जियों का मिक्स जूस पी सकते हैं। गाजर-चुकंदर के जूस में काफी कैलोरी होती है। कई कॉम्बिनेशन प्रयोग कर सकते हैं। जूस में कद्दू, सूरजमुखी व अलसी के बीज मिला सकते हैं। इनसे पौष्टिकता की मात्रा बढ़ेगी।
- न्यूट्रीबुलेट जैसी नई मशीनों की मदद से बिना गूदा-फाइबर निकला जूस मिल सकता है।
- ताजा जूस ही पीएं। जब जूस पीना हो तभी फल या सब्जी छीलें व काटें। कुछ घंटे पहले कटे फल या सब्जियों का जूस न बनाएं।
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