तापमान बढ़ते ही गर्म हवाओं और तपिश से सबसे ज्यादा त्वचा प्रभावित होती है। त्वचा पर फुंसियां उभरना, पसीना व बार-बार प्यास लगना आम बात है। ऐसे में खानपान और तरल पदार्थों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि गर्मी के असर को कम किया जा सके। जानें किन बातों का रखें खयाल-
दोपहर में बाहर निकलना हो तो
दोपहर के बजाय सुबह या शाम घर से बाहर निकलने का प्रयास करें। यदि निकलना भी पड़े तो सूर्य की तेज किरणों से बचाव के लिए आंखों पर सनग्लास, सिर पर कैप पहन सकते हैं और साथ में पानी की बोतल जरूर रखें। इस मौसम में पित्त बढ़ने से पसीना व पाचनतंत्र में गड़बड़ी होने लगती है। डिहाइड्रेशन की स्थिति न बनें, इसके लिए दिनभर में जूस, छाछ व 6-7 गिलास पानी पीएं।
स्किन का खास खयाल
गर्मी में धूप और शरीर में पानी की कमी से स्किन पर लाल चकत्ते, त्वचा का झुलसना, फुंसी, डायरिया, जलन जैसी समस्याएं ज्यादा होती हैं। ऐसे में इन्हें अपना सकते हैं।
कूलबाथ
दिन की शुरुआत ठंडे पानी से नहाकर करें। इसके लिए पुदीना की ताजा या सूखी पत्तियों को आधे घंटे तक पानी में उबालें। पानी के गाढ़ा होने पर इसे छानकर ठंडा करें। नहाने के बाद पेस्ट को शरीर के पसीने वाले हिस्सों पर लगाने से त्वचा व दिमाग को ठंडक, ताजगी और राहत मिलेगी।
रोजबाथ
विकल्प के तौर पर गुलाब के फूल या फिर गुलाब एसेंस ऑयल से स्नान कर सकते हैं। इसके लिए रातभर इन फूलों को पानी या नहाने के टब में भिगोएं। सुबह इस पानी से नहाएं। यह शरीर-दिमाग दोनों को तरोताजा रखता है। साथ ही यह सूर्य की किरणों से बचाने के साथ त्वचा को मुलायम बनाता है।
डाइट
आयुर्वेद के मुताबिक ठंडे आहार के तौर पर ऐसे फल व सब्जियां खाएं जो मीठे, रसदार व प्राकृतिक रूप से खूबसूरती बढ़ाते हैं। नाशपाती, तरबूज, चेरी, आम, मौसमी व अंगूर ले सकते हैं। ब्रोकली, खीरा व तुरई ठंडक देते हैं। खट्टी व गर्म चीजें (टमाटर, लहसुन, कालीमिर्च, मूली व प्याज) से परहेज करें।
कूलिंग एक्सरसाइज
स्वीमिंग बेहतरीन व्यायाम है। इससे शरीर को ठंडक व राहत मिलने के साथ त्वचा में रंगत और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इस मौसम में सुबह-शाम की 15-20 मिनट की सैर फायदेमंद है। आयुर्वेद में बॉडी-माइंड को ठंडा, तेज व शांत रखने के लिए शीतली प्राणायाम करने की सलाह दी जाती है।
जीवनशैली का ध्यान
तनाव न लें। काम से फुर्सत निकालकर परिवार और दोस्तों के साथ वीकएंड पर जाएं। किसी ठंडे हिल स्टेशन पर छुट्टी बिताने का प्लान बनाएं। मेडिटेशन भी मददगार है।
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