Friday, 19 July 2019

मशरूम का सूप, सलाद और अचार सेहत के लिए फायदेमंद

आयुर्वेदाचार्यों द्वारा किए शोध के बाद से मशरूम को एक बेहद पौष्टिक सब्जी के रूप में पहचान मिली। आमतौर पर यह प्राकृतिक रूप से खासकर गंदगी वाली जगह पर उगती है। इसलिए इसमें जमीनी गंदगी के अवगुण भी आ जाते हैं जिससे कई रोगों का खतरा बढ़ता है। लेकिन इन दिनों इसे कृत्रिम रूप से उगाते हैं जिसमें साफ-सफाई के साथ कुछ ऐसे रसायन का प्रयोग करते हैं जिससे यह खाने लायक बन सके। खाने वाली गुच्छी मशरूम की खेती हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तराखंड में की जाती है।

हर रूप में पौष्टिक
मशरूम की सब्जी प्रोटीन, फाइबर, फॉलिक एसिड से भरपूर होती है। इसमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, दालों की तुलना में काफी अधिक होते हैं जो किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाते। इसे सब्जी के अलावा सूप या सलाद के रूप में भी खा सकते हैं। कई जगहों पर मशरूम से तैयार अचार, कैंडी, बिस्किट, मुरब्बा आदि भी उपलब्ध हैं।

ऐसे खाएं
इसे कच्चा भी खा सकते हैं। लेकिन आयुर्वेदिक तथ्य के अनुसार इस पर मौजूद परत (सेल्यूलोज) धोने के बाद भी नहीं हटती। कच्चे रूप में खाने से इसमें मौजूद कुछ बैक्टीरिया पेट के रोगों को जन्म देते हैं। इसलिए इसे धोकर व पानी में उबालने के बाद प्रयोग में लें ताकि आंतों द्वारा इनका अवशोषण आसान हो जाए। इसे हफ्ते में 2-3 बार खा सकते हैं।

तासीर में ठंडा होने के कारण जिन लोगों को ज्यादा गर्मी लगने, ब्लीडिंग होने या पित्त संबंधी समस्या होती है जैसे पेट में जलन, अपच या कुछ खाते ही गर्माहट महसूस होना, उन्हें मशरूम को तेल के बजाय घी में छोंककर खाने के लिए कहते हैं। इसके अलावा किडनी रोगी या जिन्हें शरीर में सूजन की समस्या रहती है वे इसे न खाएं या फिर सीमित मात्रा में ही खाएं।

जिनके शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी होती है उनके लिए यह काफी अच्छा डाइट का विकल्प है। बच्चों में कमजोर हड्डियों की समस्या होने पर इसे खासतौर पर खाने के लिए देते हैं। ब्रेस्टफीड कराने वाली या गर्भवती महिलाओं के लिए यह पौष्टिक है।



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