असली ब्राह्मी की पहचान है कि इसकी एक टहनी में कई सारे पत्ते होते हैं और इसके फूल सफेद और छोटे-छोटे होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी बुद्धिवर्धक, पित्तनाशक, मजबूत याददाश्त, ठंडक देने के साथ शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। कफ को दूर करने के अलावा यह खून को साफ कर त्वचा संबंधी रोगों में भी फायदेमंद है। मानसिक रोगों में ब्राह्मी के पत्तों का चूर्ण लाभदायक होता है। हृदय की दुर्बलता में इसका प्रयोग अतिउत्तम है।
कई रूपों में उपलब्ध -
ब्राह्मी 10 ग्रा., शंखपुष्पी 3 ग्रा., बादामगिरी 2.5 ग्रा., खसकस व सूखा साबुत धनिया 10 ग्रा., त्रिफला 5 ग्रा., गोखरू 10 ग्रा., शतावर 5 ग्रा., अश्वगंधा 5 ग्रा., सौंठ 10 ग्रा. को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 3-3 ग्राम चूर्ण को सुबह-शाम दूध से लेें। इससे मानसिक व शारीरिक ताकत बढ़ेगी। आंखों की रोशनी में लाभ होता है। इसके प्रयोग से चश्मे के नम्बर में कमी आएगी। आयुर्वेद में ब्राह्मी शरबत, अवलेह औरचूर्ण आदि कई रूपों में उपयोग किया जाता है।
ये हैं फायदे-
तनाव में राहत-
5 ग्रा. ब्राह्मी, 5ग्रा. शंखपुष्पी, 6ग्रा. बादामगिरी, 3 ग्रा. इलायची के दाने, 6 ग्रा. खसखस सभी को पीस लें। ठंडाई की तरह पीने से तनाव में बहुत लाभ होता है। इसे गर्मी के मौसम में ही लिया जाना बेहतर है।
बेचैनी दूर करे -
5 ग्रा. ब्राह्मी और 2 ग्रा. कूठ के चूर्ण को 10 ग्रा. शहद में मिलाकर लेने से उदासी व बेचैनी नहीं होती।
तेज याददाश्त-
5 ग्रा. ब्राह्मी और 11 कालीमिर्च के दानों को थोड़े पानी में पीसकर पीने से फायदा होता है।
मजबूत दिमाग-
ब्राह्मी की सूखी पत्तियां और बादामगिरी को एक-एक भाग में लेकर एक चौथाई काली मिर्च की मात्रा के साथ पानी में भिगोएं। इनके मुलायम होने पर इन्हें अच्छे से मिक्स कर लें। इसके बाद इनकी 3-3 ग्राम की टिकिया बना लें। 1-1 टिकिया सुबह-शाम दूध के साथ लेने से दिमाग मजबूत होता है।
अनिद्रा (नींद न आना)
ब्राह्मी के 5 ग्रा. चूर्ण को आधा किलो दूध में अच्छी तरह उबालकर व छानकर ठंडा करें। इसे पीने से नींद न आने की पुरानी समस्या में लाभ होगा।
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