आनुवांशिक तौर पर असामान्य पेन्क्रिएटिक कोशिकाओं का अनियंत्रित रूप से बढ़ना पेंक्रिएटिक कैंसर कहलाता है।यह कैंसर दूसरे अंग में फैल सकता है। यह एक आक्रामक कैंसर है और ज्यादातर मामलों (80-90) में इसका पता इसके अधिक बढऩे के बाद चलता है। धूम्रपान, तंबाकू व मोटापा इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा अल्कोहल, रेडिएशन व रेड मीट इसका जोखिम बढ़ाते हैं।
रोग को समय रहते कैसे पहचानें?
पीलिया, खुजली, पेट में दर्द, कमरदर्द, वजन कम होना, भूख कम लगना, बार-बार उल्टी आना, पीली मिट्टी के रंग का स्टूल आदि जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टरी सलाह लें। यदि हाल ही डायबिटीज या पेन्क्रिएटाइटिस की शुरुआत है तो, अलर्ट हो जाएं।
क्या इसका इलाज संभव है?
इसके ज्यादातर मरीज तब आते हैं जब बीमारी चौथे चरण (कैंसर का लिवर, फेफड़ों या हड्डियों तक फैलाव) में पहुंच चुकी होती है। बीमारी के शुरुआती चरण में इलाज संभव है लेकिन अधिक देर करने पर स्थिति बिगड़ सकती है।
रोकथाम के उपाय और उपचार?
शुरुआती चरण में इलाज सर्जरी से संभव है। कुछ मामलों में यह दोबारा हो सकता है। इसकी आशंका कम करने के लिए नियोएडजुवैन्ट कीमोरेडियो थैरेपी सर्जरी के बाद भी जारी रखी जाए तो नतीजे बेहतर आते हैं। दर्द कम करने के लिए दवाएं उपलब्ध हैं। इससे बचने के लिए धूम्रपान से परहेज करें, वजन नियंत्रित रखें, आहार में फल, सब्जियों व अनाज शामिल करें।
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