टीवी देखने की बजाय इंटरेक्टिव स्क्रिन टाइम जैसे मोबाइल पर टैक्स्ट मैसेज करना या गेम खेलना किशोरों की नींद के घंटों को घटा रहा है। यह बात हाल में पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोध से सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सोने से पहले सिर्फ स्क्रीन पर इंटरेक्टिव समय बिताने से ही बच्चों की नींद प्रभावित नहीं होती। दिन के दौरान प्रत्येक घंटे के लिए जब बच्चे अपनी सामान्य मात्रा से अधिक वीडियो गेम खेलते हैं, तो उनकी नींद में लगभग 15 मिनट की देरी होती है।
मोटापे और मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि पर्याप्त नींद के बिना बच्चों में मोटापे के साथ मानसिक स्वास्थ्य का खतरा भी बढ़ जाता है। स्टडी के सहलेखक ऐनी मैरी चांग का कहना है कि निष्क्रिय गतिविधियां जैसे टीवी देखने से मानसिक उत्तेजना कम होती है।
सोने के घंटे भर पहले न हो स्क्रिन टाइम
प्रोफेसर चांग का कहना है कि आज के युग में बच्चों के इंटरेक्टिव स्क्रिन टाइम को कम करने के लिए माता-पिता को कुछ सीमाएं तय करनी होगी। सोने के एक घंटे पहले स्क्रिन टाइम बिल्कुल न हो। यह अध्ययन 15 साल के बच्चोें की नींद की आदतों पर केंद्रित था। इस अध्ययन को जर्नल ऑफ एडोलसेंट हैल्थ में प्रकाशित किया गया।
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