लखनऊ: कोरोना महामारी के चलते देश में खसरे और सब-एक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनेसेफलाइटिस (एसएसपीई) का खतरा बढ़ गया है. डॉक्टरों का मानना है कि 2020 से 2022 के बीच बच्चों का खसरा का टीका लगाना टलने की वजह से ये बीमारियां ज्यादा फैल रही हैं.
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के न्यूरोलॉजी विभाग ने SSPE पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर आर.के. गर्ग ने बताया, "SSPE एक दुर्लभ दिमागी बीमारी है जो मुख्य रूप से उन बच्चों और युवा वयस्कों को प्रभावित करती है जिन्हें बचपन में खसरा हुआ था."
उन्होंने कहा, "खसरे का टीका उपलब्ध होने के बावजूद, कम टीकाकरण दर या स्वास्थ्य देखभाल तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों में SSPE अभी भी एक गंभीर चिंता है."
रोग नियंत्रण केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, SSPE के मामलों में भारत यमन के बाद दूसरे स्थान पर है. डॉक्टरों का कहना है कि महामारी के दौरान टीकाकरण कार्यक्रम में रुकावट आई थी, जिससे खसरे का खतरा बढ़ गया है.
मुख्य बातें:
कोरोना के चलते खसरे का टीकाकरण रुका, अब खतरा बढ़ा.
SSPE दिमागी बीमारी है जो खसरे के बाद हो सकती है.
भारत में SSPE के मामलों की संख्या ज्यादा है.
बच्चों का समय पर खसरा का टीका लगवाना जरूरी.
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