माँ बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद क्षण होता है, लेकिन कई बार प्रसव के बाद महिलाओं में निराशा, नवजात के साथ जुड़ाव में कमी, नींद व भूख कम लगना, आत्मविश्वास में कमी, उदासी जैसे लक्षण नजर आते हैं। यह बेबी ब्लूज या पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है। यदि आपके आसपास भी किसी प्रसूता में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज न करें। अक्सर बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन को एक ही माना जाता है, जबकि यह दोनों अलग-अलग होते हैं। जानिए इनके बारे में -
क्या है बेबी ब्लूज
दरअसल बेबी ब्लूज उदासी की भावनाएं हैं जो आपको बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों में हो सकती हैं। अधिकांश मामलों में बच्चे के जन्म के 2-3 दिन में ही बेबी ब्लूज का अनुभव होता है। वे 2 सप्ताह तक चल सकते हैं। सामान्यत: यह अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसमें किसी इलाज की जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि प्रसूता में उदासी व निराशा की भावनाएं 15 दिन से ज्यादा दिखाई दें तो डॉक्टर को अवश्य दिखाएं। यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है।
संभावित कारण
गर्भावस्था के दौरान महिला में शारीरिक व मानसिक तौर पर कई बदलाव होते हैं। यह हार्मोन की वजह से होते हैं। प्रसव के बाद महिलाएं अलग मनोस्थिति से गुजरती हैं।
पोस्ट पार्टम डिप्रेशन: प्रसव के बाद बेबी ब्लूज होना आम है। ज्यादातर माताएं बच्चे के जन्म के कुछ हफ्तों के भीतर चिंता, तनाव और उदासी जैसे भावनात्मक मुद्दों से उबर जाती हैं। यदि चिंता, तनाव, निराशा, उदासी, बच्चे के साथ लगाव में कमी जैसे भाव दो सप्ताह बाद भी बने रहते हैं, तो डॉक्टर इस स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन के रूप में डायग्नोस करते हैं।
यह भी पढ़े-इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इस मौसम में रोज पीएं एक कटोरी कद्दू का सूप
बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन में अंतर
बेबी ब्लूज पोस्टपार्टम डिप्रेशन
1. बेचैनी महसूस करना दुखी रहना, ज्यादा ग्लानि महसूस करना
2. अधीर रहना अकेले रहने से डर लगना
3. बिना किसी कारण के रोना रोना, बेचैन रहना और बेहद चिंतित रहना
4. मूड स्विंग्स होना वजन घटना या बढऩा, भूख न लगना
5. उदासी खुद के या बच्चे के बारे में डरावनी सोच रखना
6. अब मैं खुद के लिए नहीं हूं, नाउम्मीद रहना, खुद को यह महसूस करना बेकार समझना
7 . शिशु जन्म के दो-तीन दिन में शिशु जन्म के 1-3 सप्ताह में शुरू होना व 15 दिन तक रहना शुरू होना और करीब सालभर तक रहना
बेबी ब्लूज हों तो क्या करें
- जितना हो सके उतनी नींद लें।
- पति या परिवार में किसी सदस्य से शिशु की देखभाल में मदद लें।
- अपने लिए समय निकालें।
- संतुलित भोजन करें और मेडिटेशन या हल्के-फुल्के व्यायाम करें।
- प्रसूता में यदि तनाव 15 दिन से अधिक नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/ZEp8fMT
No comments:
Post a Comment