Friday, 29 September 2023

जि़न्दगी की जंग लड़ी, खुद बनी प्रेरणा दुसरो को दे रही हौसला

जि़न्दगी की जंग लड़ी, खुद बनी प्रेरणा दुसरो को दे रही हौसला
निशांत तिवारी/ बिलासपुर

बचने की उम्मीद 99 प्रतिशत तक नहीं थी, लेकिन जीने की चाह ने उन्हें इस घातक बीमा इनरी से भी उबार दिया बिलासपुर. अलका पांडेय जब 40 साल की थी, उस समय डॉक्टर ने कहा की उन्हें अल्सर है। लेकिन आगे की जांच में पता चला की उन्हें कैंसर है और उनके बचने के केवल एक परसेंट चांस है। इस दौरान कैंसर की खबर ने उन्हें डिप्रेशन में धकेल दिया। क्युकी उनका एक 14 साल का बच्चा था। उन्हें दिन रात इस बात की फि़क्र लगी रहती थी की उनके जाने के बाद उनके बच्चे की देखभाल कौन करेगा। अंतत: उन्होंने इस घातक बीमारी से लडऩे का मन बनाया।

आज वह सर्जरी कराकर खुशाल जीवन जी रही है। उन्होंने बताया कि उनके शरीर से बड़ी आंत निकाल दी गई है, सिर्फ छोटी आंत है। उनका खुराक एक 4 साल के बच्चे के बराबर का है, आधा पराठा ही खा पाती है लेकिन थोड़ी-थोड़ी देर में खाते रहती है। अभी उनकी द्वै भी चल रही है लेकिन जो जि़न्दगी में अभी वह जिस भी परिस्तुईथी में है वह खुश है। आज अलका उन सभी महिलाओ के लिए प्रेरणा स्त्रोत है जो इस घातक बीमारी से जूझ रही है।


हमेशा पॉजिटिव
अलका का कहना है कि वह हमेशा पॉजिटिव रहती है। उनका इस बीमारी से जूझ रही महिलाओ के लिए सलाह है की आप इस में ज्यादा न सोचे और जरा सी भी टेंशन ना ले तभी आप स्वस्थ रह सकते है। अधिक चिंता से कैंसर जैसी घातक बीमारी आपको निगल जाएगी। इस लिए जीवन में जरुरी है की आपको सामने जो भी चुनौती आए आप उसका डट कर सामना करे। बिना लडे घुटने टेक देने से किस्मत भी आपका साथ नहीं देगी। वहां मैने 3 एड्रोस्कोपी कराया और दवाई खा रही थी। दवाई खाते-खाते जो अल्सर था वह कैंसर का रूप से लिया। तब तक पता नहीं था कि मुझे कैंसर है। जब मेरा गला चोक हो गया था। मुंह में एक चम्मच पानी नहीं जा रहा था। अगस्त 2020 में मैने फिर से डॉक्टर के पास गई और चेकअपन के लिए कहा। चेकअप की रिपोर्ट आई तो डॉक्टर ने कहा कि आपको कैंसर है, लेकिन मुझे ये नहीं बताया कि कौन से स्टेज का कैंसर है। उस समय मैं काफी डिप्रेशन में आ गई थी। उसके बाद मैं अपनी मुंबई में रहने वाली बहन और जीजा जी को बताई। जीजा ने अपने परिचित के डॉक्टर से संपर्क कर उनसे मिलने के लिए कहा। जब मैं डॉक्टर से मिली तो उन्होंने कहा पूरा प्रोसेस बताया। पर डॉक्टर ने कहा कि हम नहीं बता सकते की आपको कौन से स्टेज का कैंसर है। फिर डॉक्टर ने कहा कि आपकी कीमो थैरेपी चालू करते हैं। मेरा 3 कीम हुआ। उसके बाद डॉक्टर ने कहा कि अब सर्जरी कर सकते हैं। मेरे स्टमक यानी बड़ी आंत और छोटी आंत में कैसर था। सर्जरी के लिए मेरे एक परिचत के डॉक्टर जोशी हैं। उनसे मैने सलाह ली। मैने बोला की काफी डर लग रहा है, क्योंकि मेरा 14 साल का बेटा है। पति नहीं हैं। मै मां के साथ मायके में रहती हूं, तो मेरे बेटे को कौन सम्भालेगा। फिर डॉक्टर ध्रुव ने समझाया कि मरना हर इंसान को है। फिर परिवार के लोगों ने भी काफी समझाया। उसके बाद मैं रायपुर गई। मेकाहारा अस्तपतान के डॉक्टर भरत भूषण ने सर्जरी किया। जब सर्जरी हो गई तब पता चला कि मुझे चौथे स्टेज का कैंसर था, जिसके बचने की उम्मींद 99 प्रतिशत तक नहीं थी। सिर्फ मेरे बचने की 1 प्रतिशत ही उम्मींद थी। डॉक्टर ने मेरी बहन को पहले बता दिया था कि मेरी स्थिति क्या है। परिवार वालों ने मुझे काफी सपोर्ट किया और कहा कि मरना जीना तो लगा रहता है। मै जब ऑपरेशन के लिए गई तो यही सोच के गई थी कि मेरा एक 14 साल का बेटा है। उसके लिए मुझे जीना है। आज जो मै हूं अपने बेटे के लिए हूं।


कोविड-19 लॉकडाउन और उसके बाद बढ़ा है लोगों में डिप्रेशन
शशांक श्रीवास्तव @ भोपाल. तनाव को किसी कठिन परिस्थिति के कारण होने वाली चिंता की के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। जो की एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है जो हमें अपने जीवन में चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए प्रेरित करती है। प्रत्येक व्यक्ति कुछ हद तक तनाव का अनुभव करता है लेकिन इसका स्तर बढ़ जाने पर हालात मानसिक तनाव का रूप ले लेता है।

मानसिक तनाव आज हमारे देश ही नही बल्कि पूरी दुनिया में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कोविड-19 के लॉकडाउन और उसके बादके आंकड़े और डराने वाले है। अभी हाल ही में इस ओर ध्यान देते हुए सरकार ने टेली मानस सर्विस की शुरुआत की है जिसके जरिए वो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों तक मदद पहुंचाने का काम कर रही है। कुछ ऐसा ही काम हमारे शहर की सिमरन पारदसानी भी कर रही है। ,

अपनी लाइफ में एक पर्पस जरुर रखे : सिमरन पारदसानी
जिनके पास जीने के लिए 'क्यों' है, वे लगभग किसी भी 'कैसे' को सहन कर सकते हैं, विक्टर ई. फ्रेंकल के इस कोट से अपनी बात शुरू करते हुए सिमरन पारदसानी कहती है की अपनी लाइफ में हर किसी को एक पर्पस रखना चाहिए क्योंकि जिनके पास परपस होता है वो हर बुरे दौर से निकल आते है। कभी खुद क्लिनिकल डिप्रेशन के फेज से गुजरने वाली सिमरन आज दूसरों में मानसिक तनाव के लक्षण को पहचान कर उन्हें नई जिंदगी देने का काम कर रही है। वो बताती है कि 17 साल के उम्र में अपने पढ़ाई को लेकर मैं बहुत ज्यादा तनाव में थी। उस वक्त मेरे दोस्त भी नहीं थे जिनसे मैं अपनी फीलिंग्स शेयर कर पाती।

मेरा आत्मविश्वास खत्म सा हो गया था। फ्यूचर का कुछ सोच नही पाती थी। हर चीज अपने अगेंस्ट जाते देख मुझे बहुत गुस्सा आता था। तब मेरी मां रंजना, जो खुद एक साइकोलॉजीस्ट है, उन्होंने मेरे अंदर हो रहे बदलाव को महसूस किया और लगातार मुझसे बात करती रही। वो मुझे स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास ले गई जहां क्लिनिकल डिप्रेशन डायगोनोस्ट हुआ । फिर मैंने एक साल पढ़ाई ड्राप की और उस दौरान मैंने अपना पूरा ध्यान आर्ट और राइटिंग को निखारने पर लगाया। उस साल मैंने 12वी की परीक्षा न देकर अपने पसंद का हर वो काम किया जो मुझे अच्छा लगता था। मेरी मां हर वक्त मेरा साथ देती रही। अब मुझे ठीक हुए कई साल हो चुके है और इस दौरान मैंने कई किताबें पढ़ी और लिखी भी है। मैंने हर तरीके के डिप्रेशन के बारे में पढ़ा और जाना है। अब मैं लोगों में डिप्रेशन के लक्षण देखकर उनकी मदद करती हूं जिससे मुझे बहुत खुशी मिलती है।


कोरोना में लड़खड़ाए कदम, खुद को संभाला, तो विदेश में बने शिष्य
जबलपुर की समिधा मिश्रेकर ने मुश्किल समय में योग के जरिए खुद को संभाला
सोच- सेल्फ मोटिवेशन से जीती जा सकती है हर मु श्किल
नेहा सेन @ जबलपुर. कोरोना काल का दौर सभी के लिए परेशानी भरा रहा है। इस दौर में जहां लोगाें ने रोजगार खोए हैं, वहीं घर परिवार के सदस्यों को भी खोया है। इस बीच परेशानियों का दौर मैंने भी मानसिक तनाव के बीच झेला है, लेकिन जीवन में मैंने सीखा है कि सेल्फ मोटिवेशन से हर मु श्किल को पार किया जा सकता है। यह कहना है कि जबलपुर की समिधा मिश्रेकर का। समिधा ने ना सिर्फ कोविड की परेशानियों के बीच खुद को मानसिक तनाव से उबारा है, ब ल्कि लोगों को योग और मेडिटेशन से स्वस्थ्य रहने का रहस्य भी समझाया है।

बंद हो गए रेस्टोरेंट, हॉस्टल
समिधा ने बताया कि बात कोविड के पहले की है, जब जीवन में सब अच्छा चल रहा था। परिवार का रेस्टोरेंट और हॉस्टल अर्निंग का मुख्य जरिया था। लॉकडाउन लगते ही जीवन परेशानियों से घिर गया। अर्निंग सोर्स बंद हो जाने के कारण मैं डिप्रेशन में चली गई। परिवार में सभी के मायूस चेहरे सामने होते थे और बस एक ही चिंता थी कि आ खिर क्या होगा।

खुद से लगाव खत्म हो गया था
समिधा ने बताया कि वे शादी के पहले से लोगों को योग सिखा रहीं हैं। लेकिन खुद को डिप्रेशन से उबार पाने में काफी मु श्किल आई। उस वक्त हसबैंड संजय मिश्रेकर और खास मित्र नीलिमा देशपाण्डे ने ने भावनात्मक सहारा दिया। ध्यान, योग का असर हुआ और जीवन सामान्य हुआ। कोविड के समय ऑनलाइन योग क्लास लेना शुरू की, जो अलग-अलग शहरों के साथ-साथ विदेश तक बढ़ने लगी।

लंदन और अमरीका में क्लास
समिधा अब देश के वि भिन्न शहरों के साथ-साथ लंदन, अमरीका और साउथ अफ्रीका में भी ऑनलाइन कक्षाएं लेती हैं। इसके साथ मप्र विमन एंटप्रिन्योर एसोसिएशन से जुड़कर काम कर रहीं हैं। वे शहर आने वाले विदेशी मेहमानों को भी योग सिखाती हैं। वे कहती हैं हर किसी के जीवन में मु श्किलें हैं। हम दूसरों को खुद रहने के तरीके बताते हैं, लेकिन स्वयं इस पर अमल नहीं करते। मु श्किल समय के लिए स्वयं लड़ना पड़ता है।


आज के समय में जीवन बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, भागदौड़ की जिंदगी में युवा एक दूसरे से आगे निकलने के तनाव के तले दबे जा रहे हैं। यहां तक बच्चे और युवतियां भी इससे अलग नहीं है। मानसिक तनाव की वजह से लोग गलत रास्ते की ओर मुड़ जाते हैं इससे खुद को बचाने के साथ दूसरों का तनाव दूर करने का माध्यम हमको बनना होगा। मैं एक ऐसे परिवार से आती हूं, जिसका कोई भी सदस्य मॉडलिंग या इस इंडस्ट्री से नही है। जब मैं मुबंई आई तो पेनगेस्ट और किराए के मकान में रहना पड़ा। इस दौरान कुछ मॉडलिंग के अवसर मिले।


जीवन में कई असफलता मिले और रिजेक्शन भी मिले। इसके बाद हर बार नई शुरूआत करने के लिए खुद को तैयार किया। पूरी मेहनत, शिद्दत और आत्मविश्वास से शुरूआत की। जब भी असफलता मिली, हर बार मां से बात की उन्होंने प्रेरित किया और आगे बढ़ती गई। मैं सभी को कहना चाहती हूं चुनौतियां जीवन में आती है उतार और चढ़ाव भी आते हैं लेकिन आपको उनसे घवराना नहीं है ब ल्कि परि िस्थतियों से लड़ना है पूरी मेहनत के साथ। यदि असफल हो जाते हैं तो एक नया प्रयास करना चाहिए और पहले से ज्यादा मेहनत और अतिरिक्त प्रयास के साथ आपका विश्वास आपको सफल जरूर बनाने वाला है।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अब महिलाओं को केंद्र में रखकर खूब फिल्में बनने लगी है और लोग इस तरह के नए विषय देखना भी पसंद करते हैं। इडंस्ट्री में सभी को योग्यता के अनुसार काम और फीस मिलती है यहां किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है। भारतीय दर्शक वैसे भी कला और योग्यता प्रेमी है यदि आपमें आर्ट है तो आपके सामने कोई बाधा रास्ता नहीं रोक सकती है।

खुद से जुड़ाव जरूरी
भाग दौड़ से भरे जीवन में यह जरूरी है की हम खुद से एक जुड़ाव महसूस करें। यह आम सी बात हो गई है की युवाओं को भी स्ट्रेस और डिप्रेशन का सामना करना पढ़ रह है। इन सब से बचने का एक तरीका है की हम ऐसी परिस्थिति में अपने मन और भावनाओं को शांत रखें। इसके लिए आप मैडिटेशन को अपने डेली लाइफस्टाइल में अपनाएं। स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सभी के लिए मैडिटेशन करना जरूरी हो जाता है।

चैलेंजेज जीवन का हिस्सा हैं-
चैलेंजेज हर जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन हमें मजबूत हो कर और कड़ी मेहनत से इन सब चैलेंज से लड़ना है और खुद को बेहतर साबित करना है। कोई भी परेशानी हो हमेशा अपना बेस्ट करें। जीवन में किसी भी चैलेंज से आप गुजर रहे हों, इससे लड़ने के लिए हमेशा एक्स्ट्रा एफर्ट की कोशिश करें। इसके साथ आपको खुद की काबिलियत पर पूरा विश्वास होना महत्वपूर्ण हैं। जितना आपका खुद पर मजबूत विश्वास होगा उतना ही आप एक पॉजिटिव लाइफस्टाइल जी पाएंगे।

संघर्षों को देख कर अपना रास्ता न बदलें
मनुष्य को अपने जीवन में आने वाले संघर्षों को देख कर अपनी मंजिल का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। बल्कि उनसे डटकर सामना करना चाहिए। ऐसे में जरूरी है कि आप खुद को उस काबिल बनाएं न कि रास्ते से हट जाएं। आपकी मेहनत आपको मंजिल तक पहुंचाएगी।



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