दवाएं और सर्जरी जीवन को बचाती हैं और फिजियोथैरेपी जीवन चलाती है। कोविड के बाद लोगों का इस थैरेपी में विश्वास बढ़ा है। लोगों को अब समझ में आने लगा है कि चिकित्सा में फिजियोथैरेपी का भी महत्वपूर्ण योगदान है। चाहे हड्डी की चोट हो या ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी, फिजियोथैरेपी की जरूरत अब सभी में पडऩे लगी है। फिजियोथैरेपी स्पोर्ट्स मेडिसिन का अहम हिस्सा है।
फिजियोथैरेपी के लिए यदि आपको डॉक्टर ने सलाह दी है और आप किसी थैरेपिस्ट के पास इलाज के लिए जा रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें। अपनी बीमारी से संबंधित प्रश्नों की सूची रखें, ताकि आपको थैरेपिस्ट के पास अपने सवालों के जवाब मिल सकें। अपनी सभी रिपोट्र्स साथ लेकर जाएं। ताकि आपकी रिपोट्र्स से उन्हें समस्या स्पष्ट हो सके। फिजियोथैरेपी के लिए जाएं तो पेट भरकर खाना खाकर न जाएं।
भोजन और थैरेपी लेने के बीच कम से कम एक घंटे का अंतराल रखें। बेहद टाइट कपड़े न पहनें। शरीर को हाइड्रेट रखें। वैसे तो फिजियोथैरेपी आप कभी भी ले सकते हैं, लेकिन जैसे कहा जाता है कि सुबह एक्सरसाइज करना शरीर पर ज्यादा प्रभावी होता है। सुबह थैरेपी लेना भी फायदेमंद होता है।
कई ऐसी शारीरिक समस्याएं होती हैं जिसमें बिना फिजियोथैरेपी के इलाज पूरा नहीं होता है। इसमें हड्डी से संबंधित रोग, कमर व पीठ का दर्द, पुरानी बीमारी, लकवा आदि शामिल हैं। एक्सरसाइज या खेल के दौरान मांसपेशियों में आए खिंचाव का इलाज भी फिजियोथैरेपी के जरिए किया जाता है। जीरियाटिक मेडिसिन में भी यह थैरेपी दी जाती है। ऐसा नहीं है कि किसी विशेष उम्र में ही यह थैरेपी दी जा सकती है। किसी भी उम्र में यह थैरेपी ले सकते हैं। अब पीडियाट्रिक और प्रेग्नेंसी के दौरान फिजियोथैरेपी जैसे क्षेत्र भी विकसित हो रहे हैं।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/w8GO9dJ
No comments:
Post a Comment