Sunday, 30 July 2023

अच्छी आदतों से शरीर के तापमान को रखें नियंत्रित, मौसमी बीमारियों से होगा बचाव

अचानक से तेज धूप और गर्मी के कारण कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। गर्मी बढऩे के कारण मौसमी समस्याएं जैसे पेट में अपच, गैस, पित्त का बढऩा, पेट में इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इनमें उल्टी, जी मिचलाना, सिर दर्द और अपच प्रमुख लक्षण होते हैं। अच्छी आदतों को अपनाते हुए इनसे बचाव किया जाता सकता है। जानते हैं इसके बारे में-

गर्मी बढऩे से दिक्कत क्यों
शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है। इससे 5-8 डिग्री कम-ज्यादा होने पर शरीर सहन कर लेता, लेकिन अधिक अंतर होने पर शरीर का मेटोबॉलिज्म बदलता है। शरीर को ज्यादा काम करना पड़ता, दिक्कत शुरू होती है।

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गलत आदतों से बीमारियां
मौसम से शरीर का तापमान बढने और सावधानी नहीं रखने से बीमारियां होती हैं। पर्याप्त आराम नहीं करना, ज्यादा मिर्च-मसालेदार, बासी खाना खाने, नशा करने, ज्यादा चाय-कॉफी पीने, लंबे समय तक बैठे रहना और समय पर डाइट न लेने से भी बीमारियों की आशंका रहती है। जो लोग नियमित व्यायाम नहीं करते हैं, उनमें भी परेशानी हो सकती है। व्यायाम शरीर को सक्रिय रख बीमारियों से बचाता है।

एक रोटी कम ही खाएं
गर्मी से बचाव में डाइट अहम होती है। इस मौसम में सादा व हल्का आहार हो। भूख से एक रोटी कम खाएं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीएं। दोपहर में छाछ, लस्सी या दही जरूर लें।

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आहार में इन्हें ज्यादा लें
केले में मौजूद पोटैशियम आंतों में एक लेयर बनाता है, जिससे एसिड बनने की प्रक्रिया रुकती है। इसमें फाइबर भी अधिक होता है। रोज 4-5 पत्तियां पुदीने की खाएं। इससे भी एसिड कम होता है। खाने के बाद एक चम्मच सौंफ व थोड़ी मिश्री लेने से गैस नहीं बनती है। नाश्ते के बाद एक गिलास ठंडा दूध भी पी सकते हैं।

घरेलू उपाय भी कारगर
लू में प्याज का रस और इमली का पानी पिलाने से राहत मिलती है। चंदन या शर्बत के साथ कामदुधा रस दो-दो घंटे पर लें। श्वास कुठार रस, चंदन-कपूर घिसकर शरीर पर लगाएं। इससे भी ठंडक मिलती है। नीम की लकड़ी-लाल चंदन पानी में घिसकर व कलमी-शोरा मिलाकर बदन पर लगाएं। इससे ठंडक मिलती है।

लू लगने पर ये करें
कच्चे आम की चटनी, आमपना, जलजीरा, नींबू शिकंजी, दही, छाछ ज्यादा मात्रा में लें। अपने डॉक्टर को दिखाएं। बुखार होने पर खुली हवा में आराम करें। तेज बुखार जैसे 102 से अधिक होने पर दवा के साथ शरीर पर ठंडी पट्टी करें। ध्यान रखें कि डायरिया के साथ बुखार नहीं है तो दवा लेने से बचें।

लक्षण
उल्टी, जी मिचलाना, गले में जलन, पेट फूलना, मुंह में खट्टा पानी आना, गैस, दस्त, शरीर में पानी की कमी, यूरिन कम होना, आंखों के आगे अंधेरा छाना, बुखार, डकारें, छाती में जलन, सिरदर्द आदि।

 

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इन आदतों से भी राहत
गर्मी में पसीने के साथ लवण भी निकल जाते हैं। इससे बचाव के लिए हर घंटे थोड़ा पानी जरूर पीएं। पानी में नींबू और एक चुटकी नमक जरूर मिला लें।
शरीर को ठंडक देने वाली चीजें जैसे तरबूत, खरबूज, ककड़ी, बेल, शहतूत, फालसे आदि खाते रहना चाहिए।
खस, चंदन, गुलाब जैसे सुगंधित पदार्थों से बनी चीजें, लस्सी, छाछ, शर्बत आदि लें।
दिन में दो बार स्नान जरूर करें। दिन में सोने से बचें। गीले कपड़े न पहनें।
किसी भी प्रकार का नशा न करें। इससे शरीर में दूषित तत्त्वों की मात्रा बढ़ती है। इस मौसम में गर्म पानी से न नहाएं।
गर्मी में हैवी वर्कआउट करने से बचें। इससे भी शरीर का तापमान बढ़ जाता है। जिससे बीमारियों की आशंका बढ़ती है।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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