Sunday, 23 July 2023

सेहत व पर्यावरण के लिए घर में लगाएं औषधीय पौधे, मिलेंगे ये चमत्कारी फायदे

Medicinal plants benefits: पर्यावरण और जीवन के बीच अटूट रिश्ता है और इस रिश्ते के बीच की महत्त्वपूर्ण कड़ी हैं पेड़-पौधे। ये पेड़-पौधे हमारे 'डॉक्टर' हैं। दादी-नानी के नुस्खों का आधार भी यही पेड़-पौधे हुआ करते थे। आपने देखा होगा कि पुराने समय में घरों में औषधीय महत्त्व वाले पौधे अवश्य लगाए जाते थे, ताकि उनसे छोटी बीमारियों का उपचार किया जा सके। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. तरुण शर्मा व कृषि वैज्ञानिक डॉ. अतरसिंह मीना बता रहे हैं ऐसे पौधों के बारे में, जिन्हें घर में लगाकर सेहत व पर्यावरण बेहतर बनाए जा सकते हैं।

 

गिलोय
इसे हार्ट लीफ मूनसीड भी कहा जाता है। घर में नीम का पेड़ है तो इसकी बेल को नीम पर चढ़ाएं। गुणवत्ता बढ़ेगी।
फायदे: इसे काढ़े व ताजा रस के रूप में लिया जा सकता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक है।

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हडज़ोड़
इसकी खंडाकार बेल होती है। उसके हर खंड से एक नया पौधा पनप सकता है। इस पौधे की प्रकृति गर्म है।
फायदे: इसे चूर्ण या लेप की तरह उपयोग किया जाता है। शरीर की टूटी हुई हड्डियों को जोड़ता है। ऑस्टियोपोरोसिस में कारगर है।

 

अश्वगंधा
आयुर्वेद में इसका व्यापक उपयोग है। यह सब-ट्रोपिकल जगहों पर अच्छा बढ़ता है।
फायदे: इसकी जड़ों का चूर्ण दूध के साथ ले सकते हैं। यह नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा टॉनिक और इम्युनिटी बूस्टर है।

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पत्थरचट्टा
इसे आयुर्वेद में भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी भी कहा जाता है।
फायदे: इसका जूस या चूर्ण ले सकते हैं। यह पथरी के लिए प्रयोग किया जाता है और अच्छा डाइयूरेटिक है।

 

कालमेघ
कालमेघ को देसी चिरायता भी कहते हैं। यह बेहद कड़वा पौधा है।
फायदे: लिवर संबंधी समस्याओं जैसे फैटी लिवर, पीलिया में फायदेमंद है। अच्छा ब्लड प्यूरीफायर है।

 

एलोवेरा
यह बड़ी आसानी से उग जाता है। इसे अधिक पानी की आवश्यकता भी नहीं है। इसे बढऩे के लिए अच्छी धूप चाहिए।
फायदे: आप इसे जूस के रूप में और सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं। यह अच्छा हाइड्रेटिंग एजेंट है। जलने, त्वचा और बालों संबंधी समस्याओं में यह कारगर है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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