Monday, 19 June 2023

International Yoga Day 2023: हपटइटस क खतर क कम करत ह य आसन करन ह बहद आसन

लिवर शरीर के लिए मेटाबॉलिज्म एकत्रित करने, भोजन को पचाने, रक्त का शुद्धिकरण करने, चर्बी व प्रोटीन को पचाने का काम करता है। लेकिन जब लिवर में गड़बड़ी आ जाती है तो हेपेटाइटिस रोग हो जाता है। इस रोग के कारणों में वायरस या इंफेक्शन प्रमुख हैं। वायरस में हेपेटाइटिस ए और बी होते हैं। हेपेटाइटिस ए को 'इंफेक्टिव हेपेटाइटिस' कहते हैं। यह रोग दूषित पानी, खानपान और इसके रोगी के संपर्क में आने से फैलता है। हेपेटाइटिस बी को 'वायरल हेपेटाइटिस' भी कहते हैं। लार, रक्त व शरीर के स्रावों के जरिए जब यह वायरस रक्त में प्रवेश कर जाता है तो हेपेटाइटिस हो जाता है।

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क्या हैं लक्षण
हेपेटाइटिस की शुरुआत में कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते। सामान्य रूप से इस रोग की पहचान भूख की कमी एवं कमजोरी से होती है। कुछ दिनों के बाद ये लक्षण उल्टी, बुखार और सिरदर्द में परिवर्तित हो जाते हैं। रोगी को कमजोरी महसूस होती है और उसके पेशाब का रंग पीला या नारंगी हो जाता है। लिवर बहुत बड़ा हो जाता है और दाहिनी पसलियों के नीचे दर्द होता है व अंत में व्यक्ति को पांडु (पीलिया) रोग हो जाता है। इस रोग में लिवर रक्त से दूषित पदार्थ को साफ नहीं कर पाता है।

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प्रारंभिक उपचार: इसमें पीडि़त को पूर्ण आराम और हल्का भोजन करना चाहिए, पानी खूब पिएं, धूप लें, पेशाब का रंग पीला रहने तक घी, मसाले आदि से परहेज करें। बुखार हो तो इसके खत्म हो जाने पर दिन में तीन-चार बार सब्जी का सूप लें। इसके बाद उबला भोजन लेना चाहिए। फल और दूध जरूर लें।

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यौगिक उपचार
आसन : अगर बीमारी के दौरान मांसपेशियां एवं जोड़ कड़े हो गए हों तो पवन मुक्तासन, सूर्य नमस्कार तीन से सात चक्र सूर्योदय के समय कर सकते हैं।

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प्राणायाम : भस्त्रिका, सूर्यभेदन, नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास इसमें राहत देता है।
मुद्रा एवं बंध : पाशिनी मुद्रा, योगमुद्रा, विपरीतकरणी मुद्रा से इसका उपचार किया जाता है।

इन आसनों के रोजाना अभ्यास से शरीर और दिमाग का तनाव दूर होकर मन को सुकून मिलता है। लेकिन इन्हें किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करें।

 

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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