heart attack आज कल हार्ट अटैक की समस्या आम हो गई है। पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि युवाओं में हार्ट अटैक (Heart attack) के मामले बढ़ते जा रहे है। कोविड के बाद ऐसे मामलों में वृद्धि आई है। सोशल मीडिया पर हार्ट अटैक के कई वीडियो सामने आए हैं। इनमें देखा जा सकता है कि कैसे चलते फिरते, डांस करते हुए लोगों को हार्ट अटैक आ गए। वहीं हाल ही में हुई एक रिसर्च में पता चला है कि किसी भी व्यक्ति के बालों से पता लगाया जा सकता है कि भविष्य में उसे हार्ट अटैक (Heart attack) आ सकता है या नहीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसान के बालों में स्ट्र्रेस हार्मोन (stress hormones are present in human hair) मौजूद होते हैं। इसकी जांच करने के बाद हार्ट अटैक (सीवीडी) के जोखिम का पता लगाया जा सकता है।
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हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है ये हार्मोन
डबलिन, आयरलैंड में इस साल के 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' (ईसीओ) में प्रेजेंट किए गए स्टडी से पता चला है कि ग्लूकोकॉर्टीकॉइड का लेवल- स्टेरॉयड हार्मोन किसी भी इंसान के बालों में मौजूद रहता है। जो एक टाइम के बाद बढ़ जाता है। जांच करने के बाद पता चला है कि इन हार्मोन्स का लेवल फ्यूचर में बढ़ने के कारण हार्ट अटैक (Heart attack) का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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ऐसे बालों वालों को हार्ट अटैक का ज्यादा खतरा This hormone increases the risk of heart attack
रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने पुरुषों और महिलाओं की एक टीम बनाई। इस टीम में 18 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों के कुल 6,341 बालों के नमूनों लिए गए। इसके बाद इनके बालों में कोर्टिसोल और कोर्टिसोन के लेवल की जांच कि गई। जांच में पता चला कि जिन लोगों के बालों में कोर्टिसोन की मात्रा काफी ज्यादा है और काफी दिनों तक यह बढ़ा हुआ रहता है, जिसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोगों को हार्ट अटैक (Heart attack) का जोखिम दो गुना बढ़ जाता है।
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इस उम्र के बाद हार्ट अटैक का खतरा दोगुना Heart attack risk doubles after this age
स्टडी में पता चला कि जिन व्यक्तियों की उम्र 57 साल या उससे भी ज्यादा है और उनके बालों में काफी ज्यादा मात्रा में कोर्टिसोन स्तर बढ़ा हुआ है। उनमें हार्ट अटैक (Heart attack) का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। हालांकि सीवीडी के सबसे अधिक मामले 57 साल और उससे अधिक उम्र वाले लोगों को होता है। उम्मीद जताई जा रही है कि बालों की यह खास जांच इस पूरे परिक्षण के लिए काफी ज्यादा उपयोगी साबित होगी।
इस जांच प्रक्रिया के आधार पर डॉक्टर एक हद तक यह पता तो लगा सकते हैं कि कौन से व्यक्ति दिल की बीमारी, हार्ट अटैक के जोखिम में हो सकते हैं। इससे भविष्य में शरीर में तनाव हार्मोन के प्रभावों पर को कंट्रोल करने के लिए अलग से कुछ कदम उठाए जाएंगे।
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