मंकीपॉक्स भी वारयस से होता है और यही कारण है कि बीमारी से ग्रस्त लोग स्वस्थ व्यक्ति को बीमारी न दे सकें, इसके लिए क्वारंटाइन में रहना जरूरी होगा।
मंकीवायरस अब भारत में भी आ चुका है। ये संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है। इसके फैलना तब ज्यादा शुरू होता है जब स्वस्थ व्यक्ति मरीज के संपर्क में आता है। इस बीमारी के फैलने का खरता तब और बढ़ता है जब मरीज के दाने सूखने लगते हैं। दानों के सूखने पर निकलने वाली पपड़ी या नैनो पार्टिकल्स हवा में तैरने लगते हैं। इससे स्वस्थ व्यक्ति भी प्रभावित हो जाते हैं।
चार हफ्ते तक रहना होगा क्वारंटाइन
मंकीपाक्स के लक्षण नजर आते ही मरीज को क्वारटांइन में रहना होगा। ताकि अन्य लोग इस वायरस के चपेट में न आ सकें। मरीज को करीब 4 हफ्ते तक क्वरांटाइन रहना होगा। क्योंकि चार हफ्ते तक मंकीपॉक्स का मरीज दूसरे को वायरस फैला सकता है।
मंकीवायरस को लेकर सावधानी
मंकीवारयस से बचने के लिए भीड़-भाड़ में जाने से बचें।
साफ-सफाई के साथ मास्क पहनें और लोगों से दूरी बना कर रखें।
मंकीपॉक्स वायरस से ग्रस्त लोगों से चार हफ्ते तक दूर रहें।
मंकीपॉक्स के मरीज का खाना-प्लेट और कपड़े आदि सब अलग कर दें।
मरीज को एक अलग कमरे में रखें और उसके कपड़े-बिस्तर-चादर आदि को एंटीसेप्टिक घोल में धुलें।
मरीज अगर बच्चा है तो उसके साथ मास्क लगाकर रहे और विशेष सर्तकता रखें।
डिस्क्लेमर- आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल सामान्य जानकारी प्रदान करते हैं। इन्हें आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक से सलाह जरूर लें। 'पत्रिका' इसके लिए उत्तरदायी नहीं है।
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