पेरासिटामोल तेज बुखार, शरीर के हल्के दर्द, सर्दी और फ्लू जैसे लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करती है। हर घर में ये दवा जरूर होती है। डॉक्टर भी इस दवा को लक्षणों के आधार पर देते हैं। प्रेग्नेंसी तक में पेरासिटामोल दी जाती है, लेकिन क्या सच में ये दवा सेफ है? डायबिटीज, किडनी या लिवर की बीमारी में इसे लिया जा सकता है? इन सारे सवालों का जवाब पाने के लिए ये खबर पढ़ें।
कोरोना संक्रमण के दौरान भी यही दवा दी जाती है-medicine is also given during corona infection
कोरोना संक्रमण के दौरान भी डॉक्टर इस दवा पर विश्वास करते रहे हैं। हालांकि, इसके उपयोग के बावजूद, लोग अभी भी इसके बारे में बहुत नहीं जानते हैं कि ये सही मायने में कैसे काम करता है। कोरोना संक्रमण में बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षणों को कम करने के लिए पेरासिटामोल का प्रयोग होता है। इतना ही नहीं, WHO भी तेज बुखार, शरीर में मध्यम दर्द, सर्दी और फ्लू जैसे लक्षणों में इसके सेवन के सिफारिश करता है।
बता दें कि, पेरासिटामोल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर तक में लेना सेफ माना जाता है, लेकिन इंटरनेट पर दी गई सूचनाओं ने इस दवा के मारे में बहुत से मिथ्स फैलाए हुए हैं। तो चलिए कुछ मिथ्स और उसके पीछे की सच्चाई को जानें।
मिथक - पैरासिटामोल 24 घंटे शरीर में रहता है।
तथ्य - इस पेरासिटामोल की प्रभावशीलता खपत के 30 मिनट के भीतर शुरू होती है, और यह आमतौर पर शरीर में 4-6 घंटे तक रहती है।
मिथक - पेरासिटामोल के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव होते हैं और इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
तथ्य - पेरासिटामोल को हल्के और मध्यम दर्द में फर्स्ट इफेक्टिव मेडिसनी के रूप में जाना जाता है। और किसी भी अन्य दर्द निवारक की तुलना में इसके कम दुष्प्रभाव होते हैं।
मिथक - मधुमेह और उच्च रक्तचाप में पेरासिटामोल नहीं लेना चाहिए।
तथ्य - पेरासिटामोल एकमात्र दर्द निवारक है जिसके लिए सबसे कम ड्रग इंस्ट्रक्शन दिए जाते हैं। इसे डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर के मरीज भी ले सकते हैं।
ऑप्टिज़ोर्ब तकनीक के जरिये दवा तुरंत छोटे अणुओं में टूटने लगते है, जिससे बहुत जल्दी ही बुखार या दर्द से राहत मिलता है। हालांकि, इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर- आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
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