नई दिल्ली। आज के दौर में यह बहुत ज़रूरी हो गया है कि बच्चे शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक व भावनात्मक रूप से भी मजबूत हो, क्यूंकि जब तक वो मानसिक व भावनात्मक रूप से ठीक नहीं होंगे, तब तक वो कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम नहीं होंगे। लेकिन, उसके लिए सबसे पहले ज़रूरी है माता-पिता का व्यहार बच्चों के प्रति सही होना।
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डिप्रेशन
अगर आप किसी डिप्रेशन में होते हैं तो उसे देख बच्चे भी सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर क्या हुआ कि सब उदास बैठे हैं। यहीं सोच कभी-कभी उनको डिप्रेशन तक पहुंचा देती है। अगर आप किसी तनाव में है तो बच्चों के सामने कभी भी उसे जाहिर ना करें।
रखें अपने से दूर
अगर आप मेंटली सही नहीं है तो जितना हो सके बच्चे को अपने से दूर ही रखें। कभी-कभी गुस्सा कंट्रोल नहीं हो पाता है और वो गुस्सा बच्चों पर निकल जाता है, जिसके चलते उनके दिमाग पर असर पड़ता है। चाहे तो आप खुद भी कमरे से बाहर निकल जाएं और जब आप नार्मल हों, तभी घर लौटें।
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पढाई-लिखाई
आपकी मेंटल हेल्थ का आपके बच्चों के पढ़ाई-लिखाई पर भी असर करता है। अगर आप तरोताजा रहेंगे तो बच्चों का हर चीज में मन लगा रहता है। कई बार आपकी मेंटल हेल्थ का असर उनपर इतना पड़ता है कि वो सिर्फ किताबों की ओर देखते ही रहते हैं, और बाद में मालूम में मालूम चलता है कि वो आपके बारे में ही सोच रहे थे।
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