नई दिल्ली। हार्मोन सभी शारीरिक प्रणालियों को स्वस्थ तरीके से काम करने में सक्षम बनाते हैं - यह फिजिकल और केमिकल प्रणालियां हो सकती हैं। ये शारीरिक प्रणालियों के संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं और इस प्रकार इसके कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। परंतु मोनोपॉज के दौरान अचानक से आए बदलाव को हमारा शरीर तुरंत एक्सेप्ट नहीं कर पाता है। जिसके कारण हमारे शरीर में हार्मोन इन बैलेंस होना शुरू हो जाते हैं।
लक्षण
स्ट्रेस का बढ़ना
एक महिला की लाइफ में उम्र बढ़ने के साथ-साथ परिवार और ऑफिस के प्रति उसकी जिम्मेदारी और कर्तव्य भी बढ़ जाते हैं। इससे स्टेस का लेवल भी और अधिक बढ़ जाता है। ज्यादा स्ट्रेस से बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे कि इमोशनल लेवल के साथ-साथ वजन भी बढ़ता है।
मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोन के स्तर में असंतुलन के कारण उत्पन्न होने वाले सबसे आम लक्षण हैं –
मूड स्विंग्स
याद्दाश्त कमजोर होना
चिड़चिड़ापन
सिररदर्द
डिप्रेशन
चिंता
मूत्र असंयम
हॉट फ्लैशेज
नींद में परेशानी
ब्लोटिंग
थकान
बालों का झड़ना
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