नई दिल्ली। Eye Twitching : आंखों का फड़फड़ना अक्सर अपशुगन माना जाता है, लेकिन वास्तव में इसका वैज्ञानिक कारण है और सेहत से संबंध है। आंखों का फड़कना सामान्य तौर पर कुछ सेकेंड से लेकर मिनटों तक रहता है। यही नहीं इस तरह की परेशानी कुछ लोगों को कई दिनों तक रहती है। यदि आंख ज्यादा समय तक बार-बार फड़फड़ाती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आंखों की मांसपेशियां जब अकड़ जाती हैं तो वो फड़कने लगती हैं। ऐंठन या खिंचाव ऊपरी और नीचे की दोनों पलकों में हो सकता है। यह मायोकेमिया, ब्लेफेरोस्पाज्म और हेमीफेशियल स्पाज्म जैसी बीमारी के कारण होता है। इस दौरान आंखों के मांसपेशियों में एंठन होती है, जिसके कारण हमारे आंख फड़कते है।
आंख फड़फड़ाने के कारण
आंखों में तनाव :
दृष्टि संबंधी परेशानी होने पर चश्मा लगाने या चश्मा बदलने की जरूरत पड़ती है। इससे आंखों में तनाव होता है। मामूली आंखों की समस्या से भी आंखें फड़क सकती हैं। कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल, ऐन्टीडिप्रेसेंट दवाएं लेने, कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को ड्राई आई का अधिक खतरा होता है। आंख की सतह के लिए नमी को बनाए रखने से ऐंठन को रोकने और फड़कने के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
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नींद की कमी :
अगर आपके शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा है तो ये भी आंख फड़कने की बड़ी वजह हो सकता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि सेहतमंद रहने के लिए इंसान को कम से कम रोजाना 7-9 घंटे सोना चाहिए। इसलिए दिन के 24 घंटे में से 7-9 घंटे अपनी बॉडी को स्विच ऑफ मोड पर ही रखें।
आई स्ट्रेन :
यदि आप भी लगातार लैपटॉप, मोबाइल की स्क्रीन व अन्य आंखों पर जोड़ देने वाले कार्य करते है तो इससे भी आपकी आंखें फड़क सकती है। दरअसल, इससे आई स्ट्रेन बढ़ता है। जो आंखों के सिकुड़न का कारण बनता है।
कैफीन :
कॉफी में मौजूद कैफीन से हमारी बॉडी को बहुत ज्यादा एनेर्जी मिलती है और शरीर को जरा भी थकावट महसूस नहीं होती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि शरीर को आराम की जरूरत ही नहीं है। कैफीन का कम सेवन करें और शरीर को थकावट महसूस होने दें ताकि आपको अच्छी नींद मिल सके।
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