नई दिल्ली। Light Therapy: आपने देखा होगा कि जो घाव जलने से होते हैं वे जल्दी से ठीक नहीं हो पाते हैं। उनका इलाज आज भी बहुत मुश्किल से होता है। वे अत्यधिक दर्द देते हैं साथ ही साथ उनका निशान भी नहीं जाता है। इतना दर्द होता है कि सहन कर पाना मुश्किल हो जाता है। इससे बचाव के लिए उचित इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। अब, वैज्ञानिकों ने बताया है कि लाइट थेरेपी चिकत्सा उपचार में तेजी ला सकती है।
नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स के जर्नल में प्रकाशित हुए एक अध्यन के अनुसार ये पता चला है कि फोटोबायोमॉडुलेशन यानी पीबीएम लाइट थेरेपी का एक रूप है-जो जलने वाले घावों को तेजी से ठीक कर सकता है। इसमें टीजीएफ बीटा-1 नाम के प्रोटीन को सक्रिय करके ऐसा किया गया है जो सेल्स का डिवीज़न करके वृद्धि कर देगा।
इन परिणामों से पता चलता है कि टीजीएफ- बीटा 1 के एक्टिवेशन के बाद पीबीएम भी जले हुए घाव को ठीक करने में बेहद जरूरी भूमिका निभाता है। ये पीबीएम ट्रीटमेंट बहुत ही फायदा पहुचाएंगे। ये जले हुए हिस्से के घावों को ठीक करने में मदद करेंगे और उनको रीजनरेट भी करेंगे।
डब्ल्यूएचओ (WHO) की मानें तो दुनिया भर में जलने से लाखों लोगों की मौतें होती हैं। इसलिए इसका उपचार होना सबसे जरूरी था। क्योंकि इसका कोई भी प्रॉपर इलाज अभी तक नहीं मिला था। अब जले वाले घावों को जल्दी ठीक करा जा सकता है।और बहुत सारे लोगों कि जानें बचाई जा सकती है।
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डॉक्टर प्रवीण अरनी का कहना है कि फोटोबायोमॉड्यूलेशन थेरेपी को कैंसर ठीक करने के साथ- साथ अल्जाइमर जैसे रोगों को ठीक करने में भी उपयोग किया गया है। वैज्ञानिक ये पता लगानें में लगे हुए कि पीबीएम जले हुए चोटों के उपचार में क्या और कैसे भूमिका निभा सकता है।
चूहों पर शोध करने के दौरान ये पाया गया है कि, पीबीएम का इलाज जले हुए घावों को ठीक करने में काफी मददगार साबित होगा।
आगे डॉक्टर अरनी ने बताया है कि फोटोबायोमॉड्यूलेशन सक्रिय टीजीएफ- बीटा 1 की क्षमता के लिए सबूत प्रदान करता है। ट्रांसजेनिक बर्न घाव मॉडल का उपयोग करके ऊतक पुनजर्नन को बढ़ावा देता है।
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