Health News: आज हर तीन में से एक व्यक्ति हाई ब्लडप्रेशर यानी हाइपरटेंशन से परेशान है। इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। अन्य रोगों की तरह इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति को जब अन्य समस्या होती है तो पता चलता है कि वह तो हाई ब्लडप्रेशर का भी रोगी है। हाई ब्लडप्रेशर से बचने के लिए अपने खानपान और नियमित व्यायाम पर पूरा ध्यान दें। ब्लडप्रेशर वह दबाव है जिससे रक्त धमनियों की दीवारों से टकराता है। जब दिल धड़कता है तो धमनियों में रक्त को पंप कर देता है। ब्लड प्रेशर में दो संख्याएं होती हैं। पहली को हाई सिस्टोलिक कहते हैं। यह धमनियों का वह दाब है जब दिल के धड़कने से धमनियां रक्त से भर जाती हैं। दूसरी संख्या डायसिस्टोलिक प्रेशर कहलाती है। यह वह दाब है जब दिल दो धड़कनों के बीच आराम करता है।
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हाइपरटेंशन के कारण
1. शराब में मौजूद कैलोरी से वजन बढ़ता है जो हाइपरटेंशन का कारण है।
2. गैरकानूनी ड्रग्स जैसे कोकीन, उत्तेजक व दर्दनाशक दवा (एम्फेटमाइन्स और एसिटामिनोफैन) का सेवन।
3. अवसादरोधक (एंटीडिप्रेसेंट), कैफीन, जलन-सूजन प्रतिरोधक ड्रग्स और नाक में रूकावट के संबंध में ली गई दवाओं से ब्लडप्रेशर बढ़ सकता है।
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4. रक्तवाहिनियों में जन्मजात दोष से भी हाई ब्लडप्रेशर हो सकता है। व्यक्ति के जींस से इस तरह के हाइपरटेंशन का पता चलता है।
5. कम नींद लेने से भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।
6. ज्यादा वजन या मोटापे से हाइपरटेंशन की समस्या जन्म लेती है। शरीर में ज्यादा वसा होगी होगा तो उसे अतिरिक्त ऑक्सीजन व पोषक पदार्थ चाहिए होंगे। इनकी पूर्ति दिल करता है। जब इस अंग पर दबाव बढ़ेगा तो ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है।
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