फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने जिंदगी के लिए प्रकृति की अहमियत को पहचाना है। इसके मुताबिक अधिक बायोफीलिया (प्रकृति के साथ जुड़ाव) जीवन के लिए बेहतर है। हालांकि दिनभर जंगल में नहीं रह सकते, इसलिए मिशिगन स्कूल फॉर एनवायर्नमेंट के प्रोफेसर मैरीकॉल हंटर कहते हैं 20 से 30 मिनट प्रतिदिन पेड़ और हरियाली के बीच बैठें या सैर करें। इससे कोर्टिसोल (स्ट्रेस पैदा करने वाला हार्मोन) का स्तर कम होता है। यह तनाव कम करने और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों को रोकने के लिए कम खर्चीला और कम जोखिमभरा उपाय है। अध्ययन के अन्य लेखक प्रोफेसर गेविन जेनकिंस कहते हैं कि शहरीकरण के बीच हरियाली का दम घुट रहा है। ये सरकारों के सामने चुनौती है कि वे शहरों में पार्कों को अपने मास्टर प्लान का हिस्सा बनाएं। तभी प्रकृति को महसूस किया जा सकता है।
36 नागरिकों पर दो माह चला शोध
प्रकृति के इस असर को देखने के लिए हंटर और उसके सहयोगियों ने 36 नागरिकों को दो महीने तक हर सप्ताह तीन बार प्रकृति के साथ 10 मिनट बिताने के लिए कहा। हर दो सप्ताह बाद शोधकर्ताओं ने तनाव को मापने के लिए प्रकृति के करीब जाने से पहले और बाद में इन लोगों की लार के नमूने लिए। आंकड़ों से पता चला कि कोर्टिसोल का स्तर कम करने के लिए 20 मिनट का समय पर्याप्त था। हालांकि 20 से 30 मिनट के बीच सबसे बेहतर प्रभाव नजर आया।
ब्रिटेन में शोध : सप्ताह में दो घंटे पार्क में बिताइए
ब्रिटेन में 20 हजार लोगों पर किए ऐसे ही एक शोध में सामने आया कि एक पार्क या जंगल में हर सप्ताह बिताए दो घंटे आपके स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। भले ही इस दौरान आप व्यायाम न करें तो भी प्रकृति का सामिप्य आपको स्वस्थ रखेगा। हालांकि व्यायाम किया जाए तो और बेहतर है।
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