कारोना के अधिकतर मरीजों को लोग बिना डॉक्टरी सलाह के ही प्रोनिंग करवा रहे हैं। हालांकि इसको सही तरीके से करें तो कोई नुकसान नहीं है। लेकिन यह सभी को जरूरी नहीं है। उन्हीं लोगों को अनिवार्य है जिनका ऑक्सीजन लेवल 94% से कम और 92 फीसदी से अधिक है। उसमें भी यह 80% तक कारगर है। लेकिन आक्सीजन का 92% से कम है तो इसके भरोसे न बैठें। तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। प्रोनिंग में पांच तरह से लेटना होता है। इनमें दाहिने करवट, 30-60 डिग्री पीठ के बल लेटना, बाईं करवट, आधे पेट के बल आराम की स्थिति और पेट के बल लेटना होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोनिंग में एक पोजिशन में 30 मिनट से दो घंटे तक लेट सकते हैं लेकिन एक पोजिशन में 30 मिनट तक रही रहें और फिर करवट बदल दें। प्रोनिंग करवट बदल-बदलकर पूरे दिन में 16 घंटे तक कर सकते हैं। खाने के एक के अंदर ऐसा न करें। उल्टी आ सकती है। इसमें चार- पांच तकिए की जरूरत पड़ती है। यह कहां और कैसे लगाना है इसको सीख लें।
Social Media fact; 5जी नेटवर्क से नहीं, खांसने-छींकेने से फैलता है कोरोना
को रोना के तेजी से फैलने को लेकर एक गलत खबर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें हरियाणा की एक समाज सेविका के हवाले से कहा गया है कि देश में 5जी नेटवर्क के रेडिएशन से कोरोना तेजी से फैल रहा है। देश में 5जी बंद करते ही कोरोना का संक्रमण रुक जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसको गलत बताया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोना सांस की बूंदों, छींकने, बात करने, थूकने, संक्रमित व्यक्ति से फैलता था। यह वायरस नाक, मुंह और आंखों से शरीर में जाकर संक्रमण करता है।
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