देश में कोरोना की दूसरी लहर ने जो तबाही मचाई है वह अब भी बेकाबू है।ऐसे में हर व्यक्ति अपने स्तर पर मदद कर रहा है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। लेकिन कोरोना का शरीर के अंदरूनी अंगों पर होने वाला असर जांचने के लिए अभी बहुत ज़्यादा पहल नहीं हुई है। लेकिन अब इस मामले में भी लोग सक्रिय हो रहे हैं। देश में कोरोना के शोध कार्य के लिए अब तक तीन लोगों ने ही अपनी देह दान की है। हैरानी की बात यह है की ये तीनो ही बंगाल से हैं।
आइये जानते हैं इनके बारे में।
कोरोना महामारी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों को मानव शरीर पर किए जाने परीक्षणों के लिए 93 वर्षीय महिला ने देहदान किया है। कोलकाता निवासी ट्रेड यूनियन नेता ज्योत्सना बोस ऐसा करने वाली देश की पहली महिला बन गई हैं। उनसे पहले सिर्फ ब्रोजो रॉॅय ने मृत्यु के बाद अपने शरीर पर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए देह दान की थी।
ज्योत्सना ने अपना शरीर कोलकाता के 'गंधरपन' चिकित्सकीय शोध संस्थान को मृत्यु के बाद देह दान किया है। इन दोनों से प्रेरित होकर डॉ. बिस्वजीत चौधरी नेभी देहदान कर तीसरे बंगाली दानदाता के रूप में अपना नाम दर्ज करवाया है।ज्योत्सना की 16 मई को कोरोना से मृत्यु हो गई थी। उन्होंने मृत्यु पूर्व ही ब्रोजो रॉय के गैर-लाभकारी संगठन में अपनी देह कोरोना परीक्षण के लिए दान कर दी थी।
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