Monday, 19 April 2021

Fast Food: दिमाग क्यों नहीं 'पचा पता' फास्ट फूड ?


अमरीकी खोजी पत्रकार माइक ल मॉस की हाल ही च्हूक्डज् पुस्तक प्रकाशित हुई है। उसमें उन्होंने कहा है कि जंक और प्रोसेस्ड फूड न केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि इसमें मिले नमक और चीनी का असर दिमाग पर भी पड़ता है। इसका स्वाद हमें लत की ओर ले जाता है, जो नशे की तरह है। जानते हैं कैसे-
भूख पर नियंत्रण करने में दिक्कत
कई शोधों के अनुसार जंक और फास्ट फूड खाने से न केवल मोटापा और क्रॉनिक बीमारियां बढ़ती हैं बल्कि दिमाग पर भी असर हो सकता है। इनमें पाए जाने वाले रसायन हमारे हाइपोथैलेमस को प्रभावित करते हंै। ज्यादा जंक फूड खाने वाले लोगों का भूख पर नियंत्रण खत्म हो सकता, दिमाग पेट भरने का इशारा नहीं करता है। ज्यादा खाते हैं। ओवर इटिंग हो जाती है।
अधिक चीनी से हो रही दिक्कत
अक्सर लोगों को लगता है कि जंक फूड केवल हाइ फैट होता है जबकि ऐसा नहीं है। इनमें अधिक मात्रा में चीनी और नमक होता है। इनमें चीनी की मात्रा से न केवल पौष्टिता घटाती है बल्कि आदत बनने लगती है। एक वेंडी गार्डन चिकन सलाद में 33 ग्राम और एक एशियाई सलाद 22 ग्राम शुगर से अधिक चीनी होती है। इससे मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों का जोखिम भी बढ़ता है। इनमें ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है। इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है। कई विकसित देशों में ट्रांस फैट वाले फूड पर पूरी तरह से रोक है।
इसलिए किशारों को पसंद है जंक फूड
पत्रिका ‘द लांसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हैल्थ’ में प्रकाशित शोध के अनुसार जंक फूड खाने से किशोरावस्था में ज्यादा असर हो सकता है। हाई कैलोरी और चीनी वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा खाने से खुद पर नियंत्रण क्षमता कमजोर हो जाती है। इसी उम्र में उनके दिमाग विकास हो रहा होता है। दिमाग का प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स हिस्सा जो खुद पर नियंत्रण, फैसला लेने संबंधी और इनाम संबंधी भावनाओं को नियंत्रित करता है। जंक फूड से इस हिस्से का विकास रुक जाता है। दिमाग में डोपामाइन संकेतों में भी बदलाव होता है। अधिकतर किशोर इसलिए भी ज्यादा मात्रा में जंक फूड खाते हैं ताकि उसमें उनको आनंद आता है।
प्रतिक्रिया देने में देरी
कई शोधों और विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक में पोषक तत्त्व नहीं होते हैं। इसमें केवल हाई काब्र्स होता है। सूक्ष्म पोषक तत्त्व तो बिल्कुल ही नहीं होते हैं जो हमारे दिमाग के विकास के लिए जरूरी हैं। ये सूक्ष्म पोषक तत्त्व मौसमी सब्जियों, फलों और मेवों में अधिक होते हैं। जो लोग ज्यादा जंक फूड खाते हैं उनमें प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है। एकाग्रता, सीखने की शक्ति और याद्दाश्त भी कम हो रही है। अगर 14 वर्ष की उम्र में इसे खाना शुरू करते तो 17वें वर्ष से बौद्धिकता पर असर पड़ सकता है।
याददाश्त भी घट सकती
आहार में सैचुरेटेड फैट-काब्र्स की अधिकता होने पर दिमाग के खास हिस्से हिपोकैम्पस को भी नुकसान हो सकता है। यह मस्तिष्क का मध्य भाग है जो याद्दाश्त और सीखने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है। किशोरावस्था में दिमाग के इस भाग के आकार में बढ़ोत्तरी होती है। जब सही पोषण नहीं मिलता है तो इसमें दिक्कत होने लगती है।
डॉ.प्रद्यन्या गाडगिल, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई



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