नई दिल्ली । वैज्ञानिकों ने शुक्राणु व अंडे के बगैर मानव भ्रूण विकसित करने में सफलता हासिल की है। हाथ की त्वचा की कोशिकाओं को लेकर शोधकर्ताओं ने पहली बार यह किया है। मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) की मोनाश यूनिवर्सिटी में यह उपलब्धि हासिल की गई। शोध से जुड़े जोस पोलो ने कहा, इससे पता लग सकेगा कि इस तरह मानव का विकास कैसे संभव है। इससे इनफर्टिलिटी' जैसी समस्याओं से जुड़े पहलुओं का पता चलेगा। साथ ही गर्भ के शुरुआती दो सप्ताह में बड़ी संख्या में होने वाले गर्भपात से जुड़ी कई जानकारियां भी मिल सकती हैं।
'आंसू वाली कोशिकाएं' विकसित'-
नीदरलैंड्स की एक प्रयोगशाला में भी अनोखी उपलब्धि हासिल की गई है। इंसान की उन कोशिकाओं को पेट्री डिश में विकसित किया गया है, जिनसे आंसू आते हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें चूहों में ग्राफ्ट भी कर दिया। 'सेल स्टेम सेल' साइंस जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है। यह खोज आंखों के सूखेपन के इलाज में कारगर साबित हो सकती है, जिससे दुनिया के 5 फीसदी युवा ग्रसित हैं।
11 दिन में हो जाता है नष्ट -
इस खोज ने क्लोनिंग और मानव आनुवांशिकी इंजीनियरिंग के सिद्धान्तों पर सवाल भी खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि धर्म से जुड़े लोग इस खोज को किस तरह लेंगे। यदि इन्हें विकसित नहीं किया जाता तो ये भ्रूण 11 दिन में नष्ट हो जाते हैं।
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