Tuesday, 24 November 2020

CORONA VACCINE : जानिए, आखिर कब मिलेगी कोरोना वैक्सीन? कितनी होगी कीमत?

जयपुर. कोरोना की अगली लहर का डर और वैक्सीन की उम्मीद दोनों साथ चल रही हैं। वैक्सीन के सफल प्रयोग की बहुत सारी खबरें आ रही हैं, लेकिन सब के मन में यही प्रश्न है कि वैक्सीन उन्हें कब मिलेगी? इन प्रश्नों का उत्तर जानने से पहले कुछ प्रक्रिया को समझ लेना जरूरी है। फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन 95 फीसदी तक सफल बताई जा रही है। जबकि भारत बायोटेक का तीसरा चरण सफल बताया गया है। कंपनी का कहना है कि अब सिर्फ ऑथराइजेशन की अनुमति मिलने का इंतजार है। इसके लिए हर देश में अलग नियम हैं। इसके लिए अमरीका को गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है। वे थर्ड फेज का ट्रायल सफल होने के दो महीने तक इसकी परख के बाद अप्रवूल देते हैं। इसकी कीमत को लेकर भी अभी कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन मोटे तौर पर 500 से तीन हजार के बीच एक खुराक की कीमत होगी। हालांकि अलग-अलग देशों में सरकार की सब्सिडी के बाद ये आम लोगों तक वाजिब दाम पर या मुफ्त दी जा सकती है।

एस्ट्राजेनिका : भारत के लिए राहत की बात
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, एस्ट्राजेनिका और भारत में सीरम इंस्टीट्यूट मिलकर वैक्सीन बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके तीसरे फेज का ट्रायल 90 फीसदी तक सफल रहा है। ब्रिटेन और ब्राजील में हुए इसके तीसरे ट्रायल के बाद यह दावा किया गया है। पहले वैक्सीन का आधा डोज दिय

किसे मिलेगा सबसे पहले कोरोना का टीका?
टीका किसे सबसे पहले मिलेगा, ये जटिल प्रश्न है। अमरीका में फ्रंटलाइन वर्कर्स यानी डॉक्टर्स नर्सेज सैनिटेशन वर्कर्स आदि को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके बाद 65 साल से अधिक उम्र के लोग और फिर आम आदमी तक यह पहुंच पाएगी। भारत में भी वैक्सीन वितरण का यही मॉडल चर्चा में है।

कैसे और कब तक मिलेगी वैक्सीन?
135 करोड़ की आबादी वाले देश में लगभग 270 करोड़ टीकों की जरूरत और एक वर्ष से अधिक का कार्यक्रम हो सकता है। भारत में नीति निर्धारकों का मानना है कि जुलाई-अगस्त तक 25 से 30 करोड़ लोगों को वैक्सीनेट किया जा सकेगा। वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स एक बड़ा मुद्दा होगा। वैक्सीन वितरण में कोल्ड चेन का सहारा लेना पड़ सकता है। सामान्य रेफ्रिजरेशन में भारत बायोटेक या ऑक्सफोर्ड वाली वैक्सीन को तो मैनेज कर लेगा, लेकिन फाइजर या मॉडर्ना के टीके वहां नहीं रखे जा सकते क्योंकि उनको -20 से -70 डिग्री रखना पड़ता है, उसके लिए व्यवस्था हमारे यहां अभी नहीं है।



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