मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है । इसमें दिमाग में मौजूद तरंगों में विकार आ जाता है। हमारा मस्तिष्क खरबों तंत्रिका कोशिकाओं से निर्मित है । इन कोशिकाओं की क्रियाशीलता ही हमारे कार्यों को नियंत्रित करती है। मस्तिष्क के सभी कोषों में एक विद्युतीय प्रवाह होता है। ये सारे कोष विद्युतीय नाड़ियों के जरिए आपस में संपर्क कायम रखते हैं, लेकिन जब कभी मस्तिष्क में असामान्य रूप से विद्युत का संचार होने लगता है तो व्यक्ति को एक विशेष प्रकार के झटके लगते हैं और वह बेहोश हो जाता है। बेहोशी की अवधि चंद सेकंड से लेकर पाँच मिनट तक की हो सकती है। मिर्गी का दौरा समाप्त होते ही व्यक्ति सामान्य हो जाता है।
मिर्गी के कारण -
मिर्गी के दौरे आने के कई कारण हैं । मुख्य कारण नींद की कमी है । इसके मरीजों के हार्मोन में गड़बड़ी, जलती-बुझती तेज रोशनी, नशीली दवाएं लेना, शराब पीना किसी प्रकार का नशा करना, कुछ मरीजों में भावनात्मक तनाव और छोटे बच्चों में बुखार भी कारण हो सकते हैं । सिर में चोट लगना, दिमाग में मिर्गी के कीड़े (सिस्टीसरकोसिस) का होना, ब्रेन अटैक (लकवा) आना, दिमाग में टी.बी. की बीमारी या कैंसर होना, ब्रेन ट्यूमर, ज्यादा नशा करना, दिमाग में ऑक्सीजन की कमी, कई बार पाचन संबधी परेशानी और फूड प्वॉइजनिंग भी इसके कारण हो सकते हैं।
सावधानियां -
रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की अच्छी व पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। अगर थकावट महसूस हो तो ज्यादा नींद ले सकते हैं। रोगी को जूता, प्याज आदि न सुंघाएं । मुंह पर पानी ना डालें, सांस लेने में परेशानी होती है। झाड़-फूंक न करें। मुंह में कपड़ा न ठूसें, समस्या हो सकती है। मिर्गी का दौरा मात्र दो-तीन मिनट तक रहता है, इसलिए लोगों को लगता है कि शायद उनके नुस्खे की वजह से सब ठीक हो गया है। एनर्जी के लिए संतुलित व पौष्टिक भोजन करें, तनाव न लें और पर्याप्त नींद लें।
क्या हैं लक्षण -
मिर्गी के मरीजों के शरीर में झटके आना तथा शरीर का अकड़ जाना, हाथ-पैरों में अकडऩ, मुंह से झाग आना, जीभ का बाहर निकलना, कई बार मरीज द्वारा खुद ही अपनी जीभ और होंठ को काटना प्रमुख हैं। आंखों की पुतलियों के फिरने के अलावा शरीर पर से नियंत्रण लगभग खत्म होने से कई बार मरीज कपड़ों में ही यूरिन कर देता है।
इलाज -
अधिकतर मरीजों का इलाज दवाओं और सर्जरी से होता है। रोग का इलाज कम से कम ढाई या तीन साल तक चलता है। लेकिन ध्यान रखें कि इस दौरान एक भी डोज छूटने से मिर्गी का दौरा दोबारा आने की दिक्कत हो सकती है। इसलिए दवा लेना बंद न करें। पहले की तुलना में नई दवाएं सुरक्षित होने के साथ कम दुष्प्रभाव वाली भी होती हैं।
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