तनाव या स्ट्रेस से हर व्यक्ति जूझता है। यह हमारे मन से संबंधित रोग है। हमारी मनस्थिति एवं बाहरी परिस्थिति के बीच असंतुलन एवं सामंजस्य न बनने के कारण तनाव उत्पन्न होता है। तनाव सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है। दौड़-भाग भरी इस जिंदगी में हम कभी सुख का अनुभव करते हैं तो कभी दुख... ये सुख-दुख व्यक्ति की सकारात्मक एवं नकारात्मक सोच के अनुसार पैदा होते हैं। यही सोच जब नकारात्मक विचारों में बदलती है तो हमें अनेक प्रकार के मनोरोग होने लग जाते हैं, इनमें प्रमुख है डिप्रेशन। तनाव से ग्रस्त व्यक्ति कभी भी किसी भी काम में एकाग्र नहीं हो पाता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अवसाद के कारण व्यक्ति में वजन बढ़ना जैसी समस्या हो सकती है, अवसाद में व्यक्ति के शरीर में गंभीर हार्मोनल असंतुलन हो जाता है, अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा उदास रहता है। नींद न आना, भूख न लगना, नकारात्मक सोच का हावी होना, उदास रहना, हीनभावना आना, याददाश्त व एकाग्रता में कमी, अकेलापन महसूस होना, छोटी-छोटी बातों में चिड़चिड़ापन, स्त्रियों के मासिक धर्म में अनियमितता, जोड़ों में दर्द आदि।
पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करना चाहिए जिसमें शरीर के लिए जरूरी सभी विटामिन्स और खनिज हो। -हरी पत्तेदार सब्जियाँ एवं मौसमी फलों का सेवन अधिक करें। डिप्रेशन की समस्या से पीडि़त हैं तो नियमित रूप से व्यायाम करें, सही समय पर सोएं, अपने दुखों को परिवार या साथियों के साथ बांटें, नियमित व संतुलित आहार खाएं और किसी भी प्रकार का नशा न करें। मनोचिकित्सक द्वारा बताई गई दवाइयों को नियमित रूप से लेते रहें।
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