गर्भावस्था में महिलाएं अपने होने वाले बच्चे के अच्छी सेहत के लिए तरह-तरह के प्रयास करती हैं, क्योंकि गर्भावस्था में महिलाएं जो भी करती हैं उसका सीधा असर भ्रूण पर पड़ता है। गर्भधारण के पांचवें महीने के बाद गर्भ में पल रहा भ्रूण मां की ध्वनि को सुनकर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। गर्भकाल में यदि मां धीमी आवाज में संगीत या गाना सुने तो इससे बच्चे का शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है।
गर्भावस्था के दौरान मां के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का सीधा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। इस समय मां को धीमी आवाज में म्यूजिक सुनना चाहिए इससे तनाव कम होता है, और इसका लाभ बच्चे को मिलता है। 50 डेसीबल से तेज आवाज में म्यूजिक सुनना बच्चे के लिए नुकसानदायक है। इस लिए संगीत धीमा ही सुनें। ज्यादा तेज संगीत सुनने से बच्चे की श्रवण शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है। पांचवें महीने में शिशु के कान के अंदर, मध्य और बाहरी भाग विकसित होने लगता हैं। 8 घंटे से अधिक समय तक तेज आवाज में रहने से बच्चे पर असर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को तनाव और हाइपरटेंशन रहता है अक्सर उन्हें लेबर पेन जल्दी शुरू हो जाता है। इसके साथ ही बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।
ये टिप्स भी हैं खास -
शोर-शराबे वाली जगह जाने से बचें।
तेज आवाज में बोलना भी बच्चे की सेहत पर असर डालता है।
गर्भावस्था के दौरान विचार भी सकारात्मक रखने चाहिए।
गर्भावस्था में महिलाओं को प्रेरणादायक कहानियां सुना लाभकारी रहता है। इससे गर्भस्थ बच्चे का दिमाग तेज होता है।
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