हेलसिंकी. बच्चे का जन्म हमेशा एक रहस्य की तरह है। सामान्य प्रसव से नवजात को मजबूती मिलती है। साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से लडऩे के लिए इम्यून का विकास होता है। सिजेरियन डिलिवरी से पैदा होने वाले बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं।
नॉर्मल डिलिवरी में बच्चे के गर्भ से बाहर आने की प्रक्रिया में मां के गर्भाशय से एम्युएटिक फ्युइड के साथ मल-मूत्र भी बाहर आते हैं।
बच्चा कई माइक्रोबियल भी ग्रहण कर लेता
कुछ वैज्ञानिकों को लगता है ये मल-मूत्र बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, पर शोध में सामने आया कि इसका अंश बच्चे में जाने से इम्यूनिटी बेहतर होती है, क्योंकि उसके साथ बच्चा कई माइक्रोबियल (बैक्टीरिया की खुराक) भी ग्रहण कर लेता है। जिससे उसकी इम्यूनिटी बेहतर हो जाती है। सिजेरियन ऑपरेशन से पैदा होने वाले बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं। इसलिए सिजेरियन डिलिवरी वाले बच्चों में सामान्य प्रसव वालों की अपेक्षा रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। सिजेरियन डिलिवरी वाले बच्चों में आगे चलकर एलर्जी से जुड़ी बीमारियां, डायबिटीज व मोटापा की समस्या भी होती है। फिनलैंड की राजधानी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी में वैज्ञानिकों की एक स्टडी में यह बात सामने आई है।
कोरोना काल में सामान्य प्रसव बढ़ा
कोरोना काल में सिजेरियन की बजाय सामान्य प्रसव का आंकड़ा बढ़ा है। सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार राज्यों में 64 से 91 प्रतिशत तक सिजेरियन डिलिवरी में कमी आई है। इस दौरान सामान्य प्रसव से जन्म लेने वाले बच्चों की सेहत सिजेरियन वाले बच्चों से अच्छी होगी।
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