कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच इसकी जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच के लिए गले और नाक से स्वाब लेकर परीक्षण किया जाता है। जिसे रैपिड टेस्ट भी कहते हैं। लेकिन कई बार रिपोर्ट में गड़बड़ी आ रही है। जानते हैं किन कारणों से रिपोर्ट गड़बड़ आ
सकती है।
नाक और गला ही क्यों
नाक और गले के पिछले हिस्से वायरस होने की संभावना ज्यादा होती हैं। स्वाब से इन्हीं को निकालते है। स्वाब को ऐसे सॉल्यूशन में डालते है जिनसे कोशिकाएं रिलीज होती हैं। स्वाब टेस्ट का इस्तेमाल सैंपल में मिले जेनेटिक मैटेरियल को कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड से मिलाने में किया जाता है।
70 फीसदी तक सही जांच
स्वाब टेस्ट की रिपोर्ट करीब 70त्न ही सही आती है वो भी तब जब स्वाब नाक और गले दोनों जगह से लिए गए हैं। किसी कारण एक जगह यानी नाक या गले से ही स्वाब लिया गया है और उसकी जांच की जाती है तो ऐसे नमूनों की रिपोर्ट केवल 30त्न ही सही आने की संभावना होती है। कई बार मरीज में संक्रमण होने के तत्काल बाद ही जांच नमूने ले लिए जाते हैं। ऐसे में रिपोर्ट सही आने की आशंका बहुत कम होती है क्योंकि उस समय तक मरीज के शरीर में वायरल लोड कम रहता है। ऐसे में स्वाब स्टिक में वायरस नहीं आ पाते हैं।
सही रिपोर्ट के लिए ध्यान रखें
स्वाब लेने वाला टेक्नीशियन टें्रड होना चाहिए। स्वाब स्टिक सही जगह नहीं लगाने से सैंपल में वायरस नहीं आएंगे। सैंपल को अधिक तापमान पर रखने या परीक्षण में देरी से वायरस के निष्क्रिय हो आशंका रहती है। कोविड टेस्ट के लिए व्यक्ति को संक्रमण के चार से 10 दिन के बीच में जांच करवाता है तो रिपोर्ट सही आएगी। जल्दी करवाने से निगेटिव आएगी।
डॉ. विनय सोनी, सीनियर फैमिली फिजिशियन, जयपुर
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