शुरुआत में ध्यान न देने से बढ़ती है दिक्कत
पेप्टिक अल्सर को शुरुआती चरण में ध्यान नहीं देने पर पेट के भीतर छाले बन जाना या छोटी-छोटी फुंसी हो जाती हैं जिससे स्टूल या खांसी में ब्लड निकल जाता है। इसके साथ ही कुछ मामलों में खट्टी डकार, छाती में जलन, एसिड संबंधी समस्या होने बार-बार उल्टी होने की समस्या हो जाती है। पेट में लंबे समय से हल्का मीठा दर्द है तो नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
दवाओं से इलाज संभव
एच-पायलोरी बैक्टीरिया की वजह से पेप्टिक अल्सर हुआ है तो उसके निराकरण के लिए रोगी को दो हफ्ते तक एंटीबायोटिक का कोर्स कराया जाता है। कुछ दवाएं गैस और अपच की समस्या को खत्म करने के लिए दी जाती हैं जिससे रोगी को कम से कम तकलीफ हो। पेप्टिक अल्सर के रोगियों को प्रोटॉन इनहिबिटर पंप दवा दी जाती है इसमें गैस और एंटीबायोटिक दवा का मिश्रण होता है जिससे रोगी को लाभ मिलता है। पेप्टिक अल्सर के सभी मरीजों में से दो से चार फीसदी को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। अन्य में ये बीमारी दवा के माध्यम से ठीक हो जाती है। जल्द आराम के लिए इनो, पुदीन हरा और गैस संबंधी दवाएं खा सकते हैं।
आयुवेर्द में भी है कारगर इलाज
पेप्टिक अल्सर से पीडि़त रोगी को खानपान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। रोगी को जल्द से जल्द राहत के लिए मूंग की दाल, खिचड़ी, अंकुरित चने, जौ का सत्तू, पेठा, ठंडा दूध का प्रयोग करने से आराम मिलता है। इसके अलावा आम्रलकी चूर्ण, सौंफ को रात में पानी में भिगोने के बाद उसका पानी छान कर पीने से पेट को शीतलता मिलती है और रोगी को आराम का अनुभव होता है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/32reaR0
No comments:
Post a Comment