हमारे आस-पास ऐसे बहुत से बुजुर्ग हैं जो 70-80 साल की उम्र में भी 50 के नजर आते हैं। वे किशोरों से भी दोगुने उत्साह और जोश से भरे होते हैं। दरअसल ऐसे लोगों की उम्र बढऩे की धीमी गति के पीछे ए+ जेनेटिक्स (A+ Genetics) है जो उनके स्वास्थ्य में योगदान देता है। लेकिन सिर्फ एक्टिव जेनेटिक्स से ही नहीं बल्कि स्मार्ट जीवनशैली (Smart Lifestyle) से भी व्यक्ति अपनी उम्र बढऩे की प्राकृतिक प्रक्रिया को धीमी कर सकता है।
शुगर-हार्मोन के बीच संतुलन जरूरी
वास्तव में हमारा दिमाग आराम की अवस्था में ज्यादा सतर्क रहता है। इसके लिए हमें अपने रक्त में मौजूद शुगर और हार्मोन के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। साथ ही मसल्स मास (भार or Muscles Mass) को भी मेंटेन करना होगा इससे हमारी ऊर्जा का स्तर ऊंचा बना रहता है। जब हम आंतों और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं तो बीमारियां कम होती हैं। लंबे समय तक नियमित दिनचर्या व स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर अपनी उम्र बढऩे की गति को धीमा किया जा सकता है।
अवसाद से दिमागी न्यूरॉन्स होते कमजोर
अपनी किताब 'यंगर' में स्त्री रोग विशेषज्ञ सारा गॉटफ्राइड बताती हैं कि उम्र बढऩे के साथ ही मस्तिष्क के न्यूरॉन्स अपने काम करने की गति खोने लगते हैं। हमारे आसपास का तनावपूर्ण माहौल और अवसाद मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए डॉक्टर तनाव से बचने की सलाह देते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड को करें शामिल
शरीर की ही तरह हमारे दिमाग को भी भोजन की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acid) हमारे दिमाग के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से हैं। इससे दिमाग सही ढंग से काम करता है, तनाव से दूर रहने में मदद करता है। मस्तिष्क की ऊर्जा बनाए व कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है। ओमेगा-३ इसके अलावा हृदय संबंधी बीमारियों और मधुमेह से भी बचाव करते हैं।
फैट है मधुमेह-हृदय रोगों का कारण
गॉटफ्रीड बताती हैं कि 50 वर्ष की आयु तक एक औसत वयस्क अपने शरीर का 15 प्रतिशत लीन बॉडी मास ( फैट रहित भार or Lean Body Mass) खो देता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है इसमें भी तेजी आ जाती है। मांसपेशियों का स्तर जितना कम होगा, उतना ज्यादा शरीर में फैट होगा जो मधुमेह-हृदय रोग जैसे गंभीर रोगों का कारण बनता है। मांसपेशियों का कमजोर पडऩा भी एक कारण है। विटामिन ई भी एक लाभकारी एंटी-एजिंग ऑक्सीडेंट है जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
प्रोसेस्ड और शुगर से रहें दूर
शरीर में असंतुलित ब्लड शुगर हमारी ऊर्जा और मनोदशा में गिरावट का कारण बनती है। इससे अनिद्रा और उम्र बढऩे की गति में तेजी भी आती है। मधुमेह भी हो सकता है जो खुद ही कई बीमारियों का गढ़ है। इसलिए प्रोसेस्ड फूड (Processed Food) और शुगर युक्त खानपान से बचें। शरीर में शुगर लेवल बढऩे से शारीरिक रसायन और हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जो उम्र पर सीधा प्रभाव डालते हैं। नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) भी हार्मोन के स्तर को कमजोर करते हैं।
स्वस्थ जीवनशैली जरूरी
70 प्रतिशत प्रतिरक्षा प्रणाली आंत के नीचे स्थित होती है, इसलिए रोग से लडऩे के लिए आंतों को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है। नकारात्मक विचार और तनाव भी हमारे हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर की कार्यप्रणाली को असंतुलित करते हैं। अच्छे विचार खुश रखने वाले हार्मोन और सकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं।

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