कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लॉकडाउन के चलते घर में रहने वाले बुजुर्गों पर इसका मानसिक और शारीरिक रूप से गहरा असर पड़ा है। बुजुर्गों की दिनचर्या में बदलाव या रुकावट आए तो असहजता के चलते थकान और तनाव भी महसूस होने लगता है। लॉकडाउन का बुजुर्गों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
पत्रिका ने हाल ही एक सर्वेके जरिए बुजुर्गों से पूछा था कि वे कैसे अपना समय बिता रहे हैं और खुद को खुश रख रहे हैं। जवाब में ज्यादातर बुजुर्गों ने कहा था कि वे खुद को अध्यात्म और प्रोडक्टिव कामों में व्यस्त रख रहे हैं। खासकर गार्डनिंग के जरिए लॉकडाउन में खुद को व्यस्त रखने वाले 64.56 फीसदी बुजुर्ग हैं। जबकि करीब 23 फीसदी ने सेहत और उम्र का हवाला देते हुए कहा कि वे थोड़ा बहुत ऐसा कर लेते हैं जबकि 12.66 फीसदी ने कहा कि वे कभी-कभी पौधों को पानी देने का काम कर लेते हैं।
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