आयुर्वेद और भोजन का गहरा नाता है। चिकित्स्कीय उपचारों में भी भोजन और व्यंजन को शामिल किया जाता है। अश्वगंधा की खीर भी ऐसा ही एक लाभकारी व्यंजन है। यूँ तो खीर आमतौर पर लोग स्वाद के लिए खाते हैं लेकिन अश्वगंधा की खीर न सिर्फ स्वाद के लिहाज से बेहतर है बल्कि कई रोगों को दूर करने में भी मददगार है।
लाभ : आर्थराइटिस, वृद्धावस्था की कमजोरी, चक्कर, वात की तकलीफ, नर्वस सिस्टम व नाड़ी संबंधी रोगों में फायदेमंद।
ऐसे बनाएं : 1 किलो दूध में 100 ग्राम सामक (व्रत के चावल) डालकर पकाएं। पकने के बाद 50-50 ग्राम मेवे व स्वादानुसार चीनी मिलाएं। आखिर में 50 ग्राम अश्वगंधा की जड़ से बना पाउडर डालेें। पाउडर डालने के बाद खीर को ज्यादा देर न पकाएं वर्ना औषधीय तत्वों का असर कम हो सकता है।
ध्यान रहे
कब खाएं : भोजन के बाद या साथ में दिन में एक कटोरी।
ये लोग न खाएं : दूध न पचने की समस्या व कब्ज के रोगी न लें वर्ना उल्टी, पेटदर्द या त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।
(डायबिटीज के मरीज इसमें चीनी न डालें। कॉलेस्ट्रॉल की समस्या वाले रोगी दूध व पानी समान मात्रा में लेकर खीर बनाएं।)
डिस्क्लेमर- सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है । अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। राजस्थान पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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