प्राचीन काल से ही फूलों के रस का विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों, दवाओं, रोगों और घरेलू कामोंमें उपयोग होता रहा है। प्रकृति ने हमें 4 लाख से भी ज्यादा फूलों की किस्में दी हैं। इतना ही नहीं अब तक करीब 6 लाख से ज्यादा फूलों के नाम फाइटोलॉजिस्ट (phytologist) इस सूची से हटा चुके हैं क्योंकि वे या तो किसी फूल की उप-प्रजातियां थीं या उन्हीं की हाइब्रिड प्रजतियां। दुनिया भर में मौजूद इन फूलों के रंग-रूप ही नहीं बल्कि इनके औषधीय गुण भी अलग-अलग हैं। फूलों का राजा गुलाब (Rose can cure) है। इसे यह खिताब इसकी सुंदरता के साथ इसके चमत्कारिक चिकित्सकीय गुणों के कारण भी मिला है।
आयुर्वेद में भी गुलाब का इस्तेमाल बहुत सी बीमारियों के लिए इलाज के रूप में किया जाता है। दुनिया में १५० से भी ज्यादा गुलाबों की किस्में पाई जाती हैं। इतना ही नहीं इनकी दर्जनों हाइब्रिड प्रजातियां भी हैं। गुलाब का चिकित्सकीय उपयोग बहुत गहन रोगों के इलाज में नहीं किया जाता लेकिन आंख, कान, विभिन्न चर्म रोगों, बुखार जैसे सामान्य लक्षणों के इलाज में इसका प्रयोग किया जाता है। गुलाब विशेष रूप से बिच्छु और सांप के विष के प्रभाव को कम करने में भी सक्षम है। गुलकंद का भी अनेकों प्रकार से उपयग किया जाता है। गुलकंद एसिडिटी दूर करने के काम आती है।
इन रोगों में आता काम
यह मुख संबंधी रोग, नाक-कान से खून बहने की बीमारी, जलन, प्यास लगने, विष, उल्टी आना, खूनी दस्त जैसी बीमारियों में कारगर होता है। गुलाब वातपित्त कम करने, खांसी, अल्सर, मुंह की दुर्गंध, सांस की बदबू, बदहजमी, पेट फूलना, पेट दर्द, हृदय रोग, हर्पिज, बवासीर एवं सामान्य शारीरिक कमजोरी में लाभदायक है।
ऐसे करें उपयोग
-गुलाब के फूलों का अर्क निकालकर सुबह-शाम गरारा करने से मुंह की सूजन, सांस की बदबू, गले के दर्द में आराम मिलता है। गुलाब के पत्तों को चबाने से भी मुंह और होंठों की सूजन कम होती है।
-सिर के फोड़े-फुंसी एवं घाव को ठीक करने में भी गुलाब सहायक होता है। गुलाब के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिर में होने वाले घाव, मोतियाबिंद, दंतरोग और पाइल्स में लाभ मिलता है।
-गुलाब की पंखुडिय़ों को पीसकर लगाने से पलकों की सूजन कम होने लगती है। इसके अलावा दांत पर मलने से दांत संबंधी रोगों से निजात पाने में मदद मिलती है। गुलाब के अर्क को दो बूंद आंखों में डालने से आंखों के बीमारी में भी आमरा मिलता है।
-गुलाब के फूल का प्रयोग फेफड़ों की बीमारी, टीबी इत्यादि की चिकित्सा में किया जाता है। इससे इलाज में राहत मिलती है। होंठो को गुलाबी रखने में भी गुलाब बहुत काम आता है।
-पेट संबंधी रोगों में 2.4 ग्राम गुलाब के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से कब्ज, अतिसार और दस्त में लाभ होता है।
-चेचक होने पर गुलाब के फूलों को सुखाकर चूर्ण की तरह बनाकर चेचक के रोगी के बिस्तर पर डालने से चेचक के घाव जल्दी सूख जाते हैं।
-घाव को जल्दी भरने और ठीक करने में भी गुलाब सहायक है। गुलाब के फलों को पीसकर घाव के ऊपर डालने से घाव से बहता हुआ खून कम होने लगता है और घाव जल्दी सूखता है।
-बुखार कम करने के लिए गुलकन्द का सेवन करने से पित्त ज्वर में लाभ होता है।
-बिच्छु के विष के असर को कम करने के लिए लाल गुलाब को पीसकर दंश स्थान पर लगाने से दर्द कम होता है। सूजन से भी राहत मिलती है। ऐसे ही सांप के विष को कम करने के लिए गुलाब की जड़ को पीसकर सर्पदंश स्थान पर लगाने से पीड़ा व सूजन कम होती है।
डिस्क्लेमर- सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। राजस्थान पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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