दुनिया भर के चिकित्सा विशेषज्ञ जहां अभी तक कोरोनो वायरस के इलाज की खोज नहीं कर पाए हैं। वहीं अब विभिन्न देशों की सरकारें, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां भी मानने लगी हैं कि कोरोना अभी आने वाले कुछ सालों तक हमारे बीच ही रहेगा। ऐसे में बजाय इसके खत्म होने का इंतजार करने के अब हमें इसके साथ ही रहना सीखना होगा। इसी क्रम में इलाज खोजने की दौड़ में शामिल होने की बजाय कुछ वैज्ञानिक ऐसे पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स) बनाने पर जोर दे रहे हैं जो वायरस को शरीर में पहुंचने से पहले ही मार दे। ऐसे ही एक भारतीय वैज्ञानिक दिबाकर भट्टाचार्य की कोशिश का नतीजा है हाल ही में विकसित किया गया एक नया एंटीवायरल फेसमास्क जिसके खास प्रोटियोलिटिक एंजाइम्स कोविड-19 वायरस के प्रोटीन स्पाइक्स को नष्ट कर उसे शरीर में पहुंचनेसे पहले ही मिटा देंगे।
दिबाकर ने एक नया एंटीवायरल फेस मास्क विकसित किया है जिसके संपर्क में आते ही यह जानलेवा वायरस खुद ही खत्म हो जाएगा। हालांकि मास्क को बनाने वाले केंटकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह मास्क अभी भी परीक्षण से गुजर रहा है। कोरोना वायरस को खत्म करने का यह एंटीवायरल फेस मास्क डिज़ाइन बनाने का विचार केमिकल इंजीनियर प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ मेम्ब्रेन साइंसेज के निदेशक दिबाकर भट्टाचार्य के दिमाग की उपज है। प्रोफेसर भट्टाचार्य के अनुसारसार्स-कोव-19 वायरस जो नए कोरोना संक्रमण का कारण है नए एंटीवायरल फेस मास्क के जरिए 'कैप्चर और डिएक्टिवेट' किया जा सकता है।
वायरस केसंपर्क में आने पर बदल जाएगा रंग
विश्वविद्यालय से इस डिजायन को विकसित करने के लिए भट्टाचार्य और उनके शोध दल को 1 लाख 50 हजार डॉलर की अनुदान राशि मिली थी। प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक के रूप में काम करने से पहले ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि डिजायन तैयार होने से लेकर इसके कोविड-19 को मारने में प्रभावी साबित होने तक मास्क को विकसित करने और परीक्षण करने में लगभग 6 महीने का समय लगेगा। वहीं मास्क का डिजायन तैयार होने के बाद अब विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि वह बड़े पैमाने पर नए एंटीवायरल फेस मास्क को डिजाइन करने और परीक्षण करने की सुविधा प्रदान करेगा।
भट्टाचार्य ने बताया कि मास्क में खास एंटीवायरस एंजाइम होंगे जो स्वयं कोरोना वायरस के प्रोटीन स्पाइक्स से जुड़ेंगे और उन्हें वायरस से अलग कर देंगे जिससे वायरस खुद-ब-खुद नष्ट हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मास्क हवा में घूमने वाले वायरस कणों को भी मुंह और नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करने से रोकेगा। इतना ही नहीं भट्टाचार्य का दावा है कि उनका यह मास्क कोरोना के अलावा अन्य खतरनाक वायरस और पैथोजींस से लडऩे में भी सहायक है। बेहद पतला होने के कारण पहनने वाला इसके जरिए आसानी से सांस ले सकेगा। इतना ही नहीं जब कभी मास्क की सतह नोवेल कोरोना या अन्य किसी वायरस के संपर्क में आएगी तो इसका रंग बदल जाएगा जिससे हमें वायरस के होने का भी पता चल जाएगा।

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