हाल ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि नोवेल कोरोनवायरस की चेन टूटने के महीनों बीत जाने के बाद बुधवार को कोरोना संक्रमितों के मामलों में अचानक वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कहा कि बीते 24 घंटों में नोवेल कोरोनवायरस के लगभग 1,06,662 नए संक्रमण रोगी सामने आए हैं। यह एक दिन में सामने आने वाला अब तक का सबसे ऊंचाआंकड़ा है। इसके साथ ही दुनिया में कोविड-19 संक्रमण के दुनिया भर में 5 मिलियन (5,108,945) से ज्यादा मामले सामने आ चुके है। वहीं बात करें भारत की तो सरकारी रिपोर्ट में दर्ज कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 1,10,000 से अधिक है।
इस बीच, डब्ल्यूएचओ को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक पत्र भी मिला हैए जिसने संगठन को मामले की जांच करने के लिए 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है। भारत में अब तक कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 3400 के पार हो गई है। जबकि पूरे भारत में 45,000 से अधिक लोग स्वस्थ होकर अपने घर भी लौट आए हैं। कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों की सूची में भारत 11 वें स्थान पर आ गया है।
41 से 10 लाख तक का सफर
चीन के वुहान शहर से कथित तौर पर दिसंबर में कोरोना कोरोनावायरस का पहला मामला सामने आया था और 10 जनवरी को यह बढ़कर 41 हो गया था। हालांकि, दुनिया में कोरोनोवायरस के 10 लाख मामले के आंकड़े तक पहुंचने में सिर्फ तीन महीने लगे। 1 अप्रैल को दुनिया भर में 10 लाख संक्रमित हो चुके थे। गंभीर फ्लू के मामलों की तुलना में, नोवेल कोरोना वायरस ने 6महीने से भी कम समय में लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था।
कोरोना का अभी उपचार नहीं
वर्तमान में कोविड-19 वायरस का कोई प्रभावी टीका या इलाज नहीं मिल सका है। वैश्विक स्तर पर फैलने के पांच महीनों के भीतर कोरोनावायरस दुनिया भर में 50 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित कर चुका है। हालांकि, स्थिति हर गुजरते दिन के साथ बदतर होती जा रही है क्योंकि अभी तक कोई अनुमोदित टीके या कोविड-19 के लिए उपचार नहीं है। वास्तव में, दुनिया भर में चल रहे लगभग 100 वैक्सीन प्रोजेक्ट्स के साथ विशेषज्ञों का मानना है कि एक सुरक्षित और प्रभावी टीका 12 महीने से 18 महीने से पहले नहीं बन सकता।
एंटीबॉडी रिच प्लाज्मा थेरेपी एक आशा
एंटीबॉडी-समृद्ध प्लाज्मा थेरेपी भी एक संभावित उपचार है। प्लाज्मा थेरेपी ने तेलंगाना में कई रोगियों को स्वस्थ होने में कारगर इलाज का काम किया। इसे देखते हुए इसके उपयोग को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने मंजूरी दे दी। हालांकि, अगर उचित दिशा-निर्देशों के तहत प्लाज्मा थेरेपी का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जाता है तो यह जीवन के लिए खतरे की घंटी भी हो सकती है।

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