आमतौर पर स्लीप एप्निया तब होता है, जब सोते समय किसी व्यक्ति की सांस रुकने लगती है। इसमें सांस कुछ सेकंड तक रुक सकती है। यह एक घंटे में 30 या उससे ज्यादा बार भी हो सकता है। सोने के कुछ देर बाद सामान्य सांसों में खर्राटे या खर-खर जैसी आवाजें आने लगती हैं। स्लीप एप्निया का मरीज जोर-जोर से खर्राटे लेता हैं।
स्लीप एप्निया का मुख्य कारण
इसका मुख्य कारण सामान्य से ज्यादा वजन होना, अनुवांशिक कारण व छोटा श्वांस मार्ग आदि प्रमुख है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में स्लीप एप्निया की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा बच्चे जिनके टॉन्सिल का आकार बढ़ा होता है। उनमें भी स्लीप एप्निया की आंशका ज्यादा होती है। इससे पीडि़त ज्यादातर लोग सुबह के समय खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। यदि अधिक वजन बढ़ जाता है तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ज्यादा फैट भी कारण
सोने की सही पोजीशन न होना, मांसपेशियों में बदलाव, सोने के दौरान जो मांसपेशियां श्वास मार्ग को खुला रखती हैं। कई बार जीभ के साथ शिथिल हो जाती हैं, इस कारण से वायुमार्ग सिकुडऩे लग जाते हैं। सामान्य स्थिति में जीभ की शिथिलता से वायुमार्गों में हवा का आना बंद नहीं होता। शारीरिक रुकावटें वायुमार्गों के आस-पास अधिक वसा एकत्रित होना या ऊतकों का अधिक मोटा होना। यह रुकावट वायु के प्रवाह को बंद या कम कर देती है और पहले ली गई हवा, तेज खर्राटों के साथ बाहर निकलती हैं।
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