Sunday, 5 April 2020

हर्ड इम्युनिटी: ऐसे करती है हमारी सुरक्षा

कोरोना वायरस से बचाव के लिए तरह-तरह के उपाय सुझाए जा रहे हैं। हाल ही ब्रिटेन सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार पैट्रिक वैलेस ने इससे बचाव के लिए अलग ही उपाय सुझाया है। उन्होंने कहा है कि अगर इस बीमारी के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी तैयार की ली जाए तो इससे बचाव संभव है। जानते हैं कि क्या होती है हर्ड इम्युनिटी और इसका असर कैसे होता है।
क्या है हर्ड इम्युनिटी?
यह मेडिकल साइंस की एक प्रकिया है। इसमें वायरस अथवा किसी महामारी से बचने के लिए आबादी के 50 फीसदी से अधिक लोगों को संबंधित बीमारी से संक्रमित किया जाता है। इसके बाद से उन लोगों में बीमारी से लडऩे के लिए स्वत: ही क्षमता विकसित हो जाती है। फिर बीमारी से संक्रमित जो ठीक हो गए होते हैं उनके शरीर से एंटीबॉडीज निकालकर दवा बनाया जाता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार, वैक्सीनेसन या संक्रमण से लोगों में इम्युनिटी विकसित की जाती है। पोलियो से बचाव भी उसके वायरस से ही किया गया था।
कोरोना से बचाव का तर्क
वैक्सीन यानी टीका तैयार करने में काफी समय लग सकता है। इसलिए इसका संक्रमण कराकर लोगों की इम्युनिटी बढ़ाई जा सकती है। लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यह तरीका खतरनाक भी हो सकता है क्योंकि हर्ड इम्युनिटी में केवल अच्छी इम्युनिटी वाले लोगों की जरूरत होती है जबकि कोरोना से संक्रमित होने वाले ज्यादातर कमजोर इम्युनिटी वाले लोग हैं। इसमें बुजुर्ग के साथ हृदय, डायबिटीज व बीपी आदि के मरीज हैं।



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