गेहूं ताकत बढ़ाने, पोषण देने और पौरुष बढ़ाने वाला होता है। गेहूं भूख बढ़ाने में भी मदद करता है। यह मांसपेशियों को भी मजबूत करते हैं।
गठिया दर्द से राहत देता
गेहूं के आटे के अनेक चिकित्सीय प्रयोग भी हैं। अस्थि श्रृंखला, लाक्षा अर्जुन औषधि के साथ गेहूं का आटे का दूध में सेवन अस्थिभग्न यानी ऑस्टियोपोरोसिस में उपयोगी है। केवांच बीज चूर्ण व गेहूं का आटा दूध में उबाल कर घी के साथ खाने से पौरुष शक्ति बढ़ती है। गठिया रोग में बकरी के दूध व घी में आटा मिलाकर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।
कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत
गेहूं में 12-14 प्रतिशत प्रोटीन, 50-55 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, तीन प्रतिशत मिनरल्स जिनमें आयरन, जिंक, तांबा, मैग्नीज और विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स और फाइबर पाया जाता है। गेहूं का आटा, मैदा, सूजी, अंकुरित रूप में प्रयोग किया जाता है। गेहूं का आटे विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने के साथ कई आयुर्वेदिक रूप में भी किया जाता है। इसके आटे का प्रयोग बिना छानकर करें। सभी व्यंजन शरीर को बल व उर्जा देते हैं। भोजन में रुचि व पाचन बेहतर करता है।
एक्सपर्ट : डॉ. सुमित नत्थानी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, एनआइए, जयपुर
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