आयुर्वेद में वायरस से बचाव के लिए काढा को उपयोगी माना है। आयुर्वेदिक काढ़े में कई ऐसे तत्व होते हैं जो न केवल इम्युनिटी बढ़ाते, वायरस को भी निष्क्रिय करते हैं।
गिलोय का काढ़ा
काढ़ा बनाने के लिए ज्वर हरण, गिलोय चूर्ण, त्रिकूट चूर्ण, गजाव्याधि, हरा बाशा, तुलसी पत्र, पीपल, सौंठ, अदरक, नीम की छाल, कालीमिर्च और लौंग के मिश्रण को पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे ठंडा कर लें। इसके बाद इसे छानकर पीना चाहिए।
दशमूल काढ़ा
दशमूल तत्व जैसे सौंठ, इलायची, कालीमिर्च, पीपल, लौंग, गुलेरी, दालचीनी, गिलोय, पुष्कर फूल के चूर्ण का मिश्रण एक लीटर पानी में धीमी आंच पर जब तक उबाल लें जब तक कि पानी जलकर आधा न रह जाए। इसके बाद इसे ठंडा करके साफ कपड़े से छान लें व इसे सुबह-शाम पीएं।
इनको सूंघने से फायदा
आयुर्वेद में कुछ ऐसी चीजें हैं जिनको सूंधने से भी लाभ मिलता है। लौंग या कर्पूर को पॉकेट में रखें और सूंधते रहें। दालचीनी को दिन में कई बार चूसने से बचाव होता है।
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