पीले-गंदे दांतों को तत्काल मोती जैसे चमकाने का दावा करते कई उत्पाद बाजार और ऑनलाइन स्टोर्स पर खूब मिलते हैं। इसने दांत साफ तो होते हैं लेकिन इनमें अत्याधिक मात्रा में रसायन होते हैं। दंत रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे बचना चाहिए। कई बार समस्या हो सकती है।
ब्लीच की मात्रा अधिक
इन टूथ क्लीनर में ब्लीच की मात्रा अधिक होती है। इनसे दांत चमकदार तो होते हैं लेकिन बार-बार इस्तेमाल से दांत सेंसेटिव (ठंडा-गर्म) और कमजोर होते जाते हैं। अधिक इस्तेमाल से दांत बदरंग (दाग-धब्बे) पड़ जाते हैं। डॉक्टर्स भी ब्लीच से दांत साफ करते हैं लेकिन इसकी मात्रा वे मरीज की स्थिति देखने के बाद तय करते हैं। खुद से इनको इस्तेमाल न करें। नहीं तो फायदा नहीं होगा।
मसूड़ों को नुकसान
अधिक शक्तिशाली ब्लीच में करीब ३०-३५ फीसदी हाइड्रोजन पराक्साइड होता है। इससे मसूड़ों पर लाली और हल्की जलन हो सकती है। इसके अधिक इस्तेमाल से मसूड़े सफेद हो सकते हैं। जलन की समस्या अधिक समय तक भी बनी रह सकती है। इसके साथ गले ेमें खराश और सफेद धब्बे भी पड़ सकते लेकिन यह अस्थाई होते हैं।
डॉ. शर्मिष्ठा विजय, दंत रोग विशेषज्ञ, राजकीय दंत चिकित्सालय, जयपुर
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