मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती हैं। इसके दो मुख्य प्रकार है। कुछ के दिमाग के एक हिस्से में दौरा पड़ते जबकि कुछ मरीजों को दिमाग के पूरे हिस्से में। अगर समय पर इसकी पहचानकर 2-3 साल इलाज चल जाए तो बीमारी ठीक हो जाती है। 20-30 प्रतिशत मरीजों का इलाज लंबा चलता है और करीब 10 प्रतिशत मरीजों में ऑपरेशन भी करना पड़ता है। गलत जानकारियों व सूचनाओं पर ध्यान न देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से इलाज लें। अगर बीच में एक बार भी दवा छोड़ देते हैं तो दौरे दोबारा से आ सकते हैं। इलाज की प्रक्रिया फिर शुरू करनी पड़ सकती है।
लक्षण
दौरे कई प्रकार आंशिक या पूर्ण दौरा, बेहोश होकर गिर जाना, मांसपेशियों का फडक़ना, मुंह से झाग आना, होंठ काटना
कई बार मरीज शून्य हो जाता, फिर थोड़ी देर में होश में आता
अचानक से मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देना
कारण
डिलीवरी में ऑक्सीजन की कमी, दिमाग में संक्रमण, सफाई न रखने, दिमाग में कीड़े की गांठ बनना, ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक और नसें सिकुडऩे से
शराब या नशीली दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल करना
कई बार आनुवांशिक कारण
दौरे आ रहे हैं तो
दौरा पडऩे पर रोगी को एक करवट लेटा दें
कपड़े ढीले करें, खुली हवा में रखें, आसपास भीड़ न लगाएं
सिर के नीचे मुलायम कपड़ा रखें, दौरे के समय रोगी के मुंह में कुछ न डालें
ऐसे करें बचाव
तनाव से बचें, पर्याप्त नींद, कच्ची सब्जियों न खाएं। साफ पानी से धुली सब्जियों को खाने से मिर्गी से बचा जा सकता है।
नशा करते हैं तो न करें। डिलीवरी संस्थागत होनी चाहिए। दौरे आ रहे तो ड्राइव न करें।
डॉ. दिनेश खंडेलवाल, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर
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