जॉइंट रिसर्च सेंटर कीनीति विश्लेषक और मानव व्यवहार में एक्सपर्ट डॉ. मैरिआना बैग्गिओ का कहना है कि 'महामारी के समय जोखिम प्रबंधन भी अपने आप में एक अत्यधिक जटिल कार्य है। बैग्गियो का कहना है कि कोविड-19 जैसे संक्रामक रोगों की रोकथााम और उपचार हमारे व्यक्तिगत निर्णय पर अत्यधिक निर्भर हैं। क्योंकि व्यक्ति हमेशा तर्कसंगत व्यवहार नहीं करता। महामारी के प्रकोप के समय वह अपने सामान्य व्यवहार से इतर घबराहट से भरे होते हैं जो महामारी की कथित लागत को संतुलित करने का काम करते हैं। ऐसे प्रकोपों के समय घबराहट और चिंता के कारण हमारी व्यक्तिगत निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप हम समझ ही नहीं पाते कि हमें असल में इस बीमारी से लडऩे के लिए कैसा व्यवहार करना चाहिए।
बैग्गियों का कहना है कि महामारी की शक्ल में कोरोना वायरस जैसे संक्रामक रोगों ने दशकों से अर्थव्यवस्था को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ब्लैक प्लेग या ब्लैक डेथ, प्लेग, स्पेनिश फ्लू, सार्स, इबोला वायरस, एन्थ्रेक्स, मार्स, सार्स और अब कोविड-19 जैसी संक्रामक और जानलेवा बीमारियों ने कई दशकों तक समाज और अर्थव्यवस्था को आकार दिया है। इससे उत्पन्न घबराहट का एक ताजा उदाहरण हांगकांग और सिंगापुर में 'टॉयलेट पेपर पैनिक' के रूप में भी देख सकते हैं।
दरअसल महामारी का जोखिम प्रबंधन से जुड़े स्वास्थ्य और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपाय करने की जरुरत होती है। लेकिन लोगों में डर से यह जटिल काम और मुश्किल हो जाता है। नतीजा रोज संक्रमण की चपेट में आने से रोगियों की संख्या में इजाफा होने लगता है। इसका आदर्श उदाहरण इटली के प्रधानमंत्री गिउसेप्पे कॉन्टे ने पेश किया जिन्होंने सबसे पहले नजात को 'डर से लडऩे'को कहा फिर जिम्मेदारी से काम करने की सलाह दी।
संतुलित व्यवहार करना जरूरी
व्यवहार अंतर्दृष्टि यानी 'बिहेवियरल इनसाइट' व्यवहार विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों व्यवहार अर्थशास्त्र, सामाजिक और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान एवं मानव विज्ञान (एन्थ्रोलॉजी) का एक संग्रह है जिसे एक उपकरण के रूप में महामारी के समय नागरिकों के व्यवहार को संतुलित करने में उपयोग किया जा सकता है। इन सभी विषयों को अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में शामिल कर सार्वजनिक नीति बनाने और लोगों को सूचित करने के परिष्कृत नेटवर्क के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि गैर-संचारी रोगों की बजाय संक्रामक रोग अपवाद हैं क्योंकि महामारी के समय व्यक्तिगत निर्णय लेना अब स्व-निहित या व्यक्तिगत नहीं रह गया है। बल्कि यह एक सामुदायिक मामला बन जाता है। यदि आप संक्रमित हैं और दूसरे को इसके संपर्क में आने से नहीं रोक पाते या स्वस्थ होने के बावजूद अपनी रक्षा नहीं करते हैं तो नैतिक रूप से आप भी इस महामारी के प्रकोप बनने के लिए जिम्मेदार हैं। दूसरे शब्दों मेंए जब संक्रमण को नियंत्रण में करना हो तो न केवल स्वयं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए हमारा व्यक्तिगत व्यवहार महत्वपूर्ण होता है। इससे किसी भी संक्रमित या फैलने वाले रोग प्रबंधन करना आसान होगा। रोग की रोकथाम, रोगियों का संरक्षण और चिकित्सकी कुशलता को आसानी से लागू किया जा सकेगा। लेकिन दुर्भाग्य से हम तर्कसंगत व्यवहार नहीं करते। इसलिए ऐसी परिस्थिति में दिमागी शॉर्टकट का इस्तेमाल करें। शोध बताते हैं कि मानव की तार्किक क्षमता डर जैसी कठोर परिस्थितियों में और बढ़ जाती हैं।
'अखिलीस हील' भी जिम्मेदार
महामारी के समय जब स्वास्थ्य अधिकारी और प्रशासन इस पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे होते हैं तो मानव व्यवहार का सबसे कमजोर पक्ष सामने आ जाता है। यूनानी लोकोक्ति में अखिलीस हील उस कमजोर हिस्से के लिए उपयोग किया जाता है जो हमारे पतन या मृत्यु का कारण बनता है। डर के मारे हम लोग घरों से बाहर निकलना, मिलजना-जुलना बंद कर देते हैं। कोरोना वायरस के समय भी सार्वजनिक रूप से शहरों में 'लॉक डाउन' इसका ठोस उदाहरण हैं। व्यवहार विशेषज्ञ कहते हैं कि जोखिम को कम न आंके लेकिन इसका प्रसार ऐसे न हो कि लोगों में भय पैदा हो।
क्योंकि मौत के आंकड़ों, संक्रमित लोगों की रोज बढ़ती संख्या और दुर्लभ या महामारी जैसे शब्दों का उपयोग किया जाता है तो लोगों और स्वास्थ्य विभाग के बीच संवादहीन व्याख्याएं उत्पन्न होती हैं जो भ्रम और डर को बढ़ाने का काम करती हैं। तात्कालिक अनुमान और सुलभ जानकारी पर भरोसा करने की हमारी प्रवृत्ति भी हमारे दिमाग के एक मानसिक शॉर्टकट की तरह है जो किसी घटना की आशंका से अत्यधिक भ्रामक हो सकता है। दूसरे शब्दों में, यदि आपको सनसनीखेज खबरों के शीर्षक और कोरोनावायरस की खबरें और जानकारी लगातार मिल रही हैं तो आउटब्रेक हारेते ही आपके सामने सबसे पहले यही जानकारियां और आंकड़े सामने आएंगे। जिसससे आपकी सामान्य सूझबूझ और निर्णय लेने की क्षमूता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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