Friday, 6 March 2020

थाली के दुश्मन चार, कर रहे हमें बीमार

पिछले कुछ दशकों में खानपान की चीजों में मिलावट और अनाज व अन्य चीजों के उत्पादन में कीटनाशक-रसायनों के इस्तेमाल से इनकी अंशों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इससे कई तरह की गंभीर बीमारियां भी होती हैं। जानते हैं हमारी थाली में किस तरह की मिलावट और नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पहुंच रहे हैं।
डराते हैं आंकड़े
देश में 100 से ज्यादा कीटनाशक इस्तेमाल हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कई देशों में प्रतिबंधित हैं। टॉक्सिक लिंक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में हर वर्ष करीब 20 लाख टन और भारत में लगभग 6,000 टन कीटनाशक और दूसरे रसायनों का इस्तेमाल हो रहा है।
ऐसे बदला उत्पादन
पहले खेतों से खरपतवार निकालने के लिए निराई-गुड़ाई होती थी। कंपोस्ट खाद पड़ती थी। अब रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है। इनसे न केवल इम्युनिटी बढ़ाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्व शरीर को मिलने बंद हो गए हैं बल्कि कैंसर करने वाले कीटनाशक शरीर में पहुंच रहे हैं। सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए डीडीटी, मेलाथियॉन, क्लोरडेन, ऐल्ड्रिन और क्लोरफेनविनफास आदि कीटनाशक उपयोग हो रहे हैं। इनसे कई बीमारियां होती हैं।
जल्दी पकाने में घोला जहर
आ म, केला, पपीता आदि फलों को जल्दी पकाने के लिए टैगपोन-39, इथेपान, एथलीन और एसिटिलीन आदि कैमिकल्स का प्रयोग हो रहा है। कार्बाइड से आठ गुना अधिक नुकसानदायक इथफोन से केला महज 24 घंटे में पक जाता है। इसका इस्तेमाल पशुओं में अधिक दूध देने के लिए भी किया जा रहा है। इनसे शरीर में दर्द, भूख कम लगना, पाचन संबंधी परेशानी, पेट में संक्रमण, लिवर संबंधी परेशानी और पेट से जुड़े कैंसर का भी खतरा हो जाता है। बच्चों को अधिक नुकसान है।
मिलावट है बड़ी बीमारी
खराब गुड़ को अच्छा दिखाने के लिए सोडियम फार्मेल्डिहाइड सल्फॉक्सीलेट मिलाते हैं। यह रंगीन डाई है। इससे कैंसर का खतरा रहता है। इसी तरह थाली को कलरफुल दिखाने के लिए हल्दी, मिर्च, चुकंदर, पालक आदि में फूड कलर जैसे मेटालिन और सेफोलाइट मिलाते हैं। इनसे आंत, लिवर और किडनी खराब होने का खतरा रहता है। वहीं, सिंथेटिक कलर से गला, लिवर, किडनी, आंत के रोगों के अलावा कैंसर तक हो सकता है। कलर वाला फूड खाने से बचें।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2vzuenx

No comments:

Post a Comment