आपके आस-पास भी ऐसे बहुत से बुजुर्ग होंगे जो अपनी 70 साल की उम्र में भी 50 के नजर आते हैं। वे किशोरों से भी दोगुने उत्साह और जोश से भरे होते हैं। अक्सर ऐसे लोगों को देखकर यही ईष्र्या होती है कि ये इस ढलती उम्र में भी इतने एक्टिव और चुस्त-दुरुस्त कैसे हैं? दरअसल ऐसे लोगों की सेहतमंद और उम्र बढऩे की धीमी गति के पीछे ए+ जेनेटिक्स होता है जो उनके स्वास्थ्य में योगदान देता है। लेकिन सिर्फ एक्टिव जेनेटिक्स से ही नहीं बल्कि खान-पान, तनाव का संतुलन बनाने और स्मार्ट जीवनशैली से भी हमारी उम्र बढऩे की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। अक्सर लोग इसे चेहरे की झुर्रियों को रोकने, बालों की सफेदी कम करने और चमकदार त्वचा से जोड़कर देखते हैं जबकि यह वास्तव में हमारे मस्तिष्क की सतर्कता, ऊर्जा का स्तर और बीमारी को रोकने के लिए है।
संतुलन से आएगा बदलाव
वास्तव में हमारा दिमाग आराम की अवस्था में ज्यादा सतर्क रहता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हम रक्त में मौजूद शुगर और हार्मोन के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। साथ ही मसल्स मॉस बनाए रखते हैं तो हमारी ऊर्जा का स्तर भी काफी ऊंचा होता है। इसके साथ ही जब हम आंत और प्रतिरक्षा प्रणाली को संरक्षित करते हैं तो इससे बीमारियों की रोकथाम होती है जो हमें लंबे समय तक हमारी दिनचर्या को स्वस्थ एवं अनुकूल बनाए रखती है। कोई भी इस प्रकार की जीवनशैली को अपनाकर अपनी उम्र बढऩे की गति को धीमाकर ५० की उम्र में भी ३० का महसूस कर सकते हैं।
न्यूरॉन्स पर पड़ता असर
अपनी किताब 'यंगर' में स्त्री रोग विशेषज्ञ सारा गॉटफ्राइड बताती हैं कि उम्र बएऩे के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स अपने काम करने की गति और लचीलापन खो देते हैं। हमारे आस-पास का तनवापूर्ण माहौल और अवसाद मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए चिकित्सक चिंता और तनाव से दूर रहने की सलाह देते हैं। इससे निपटने के लिए हमें लगातार अपने मस्तिष्क को 'अच्छी नींद' की खुराक देने की आवश्यकता होती है।
दिमाग को भी दें 'भोजन'
शरीर की ही तरह हमारे दिमाग को भी भोजन की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार ओमेगा-3 फैटी एसिड हमारे दिमाग के लिए सबसे जरूरी तत्वों में से हैं। इससे दिमाग सही ढंग से काम करता है, मस्तिष्क की ऊर्जा बनाए रखता है, कोशिका की देखभाल के अलावा तनाव से दूर रहने में भी मदद करता है। ओमेगा-3 इसके अलावा हृदय संबंधी बीमारियों और मधुमेह से भी बचाव करते हैं। चाहे बूढ़ा हो या युवा पानी जरूर पीना चाहिए। कोशिकाओं को नियमित ऊर्जा सप्लाई के लिए पानी की जरुरत होती है। चिकित्सकों का मानना है कि एक हाइड्रेटेड मस्तिष्क ही एक स्वस्थ मस्तिष्क होता है। एज मैनेजमेंट विशेषज्ञ चेवी चेस का कहना है कि उम्र बढऩे के साथ हमारे पेट में खाना पचाने वाले अम्ल का असर कम हो जाता है। इसे पूरा करने के लिए शरीर विटामिन-बी का उपयोग करना शुरू कर देता है। जिससे बी विटामिन को अवशोषित करने की शरीर की क्षमता अवरुद्ध होने लगती है जो तनाव का कारण बनता है। इसे दूर करने के लिए साबुत अनाज, अंडे, बीन्स, नट्स, बीज, हरी सब्जियां, मछली जैसे खाद्य पदार्थों से भरपूर बी विटामिन खाएं।
15 फीसदी रह जाता बॉडी मॉस
गॉटफ्रीड बताती हैं कि 50 वर्ष की आयु तक एक औसत वयस्क अपने शरीर का 15 प्रतिशत लीन बॉडी मॉस खो देता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है इसमें भी तेजी आ जाती है। मांसपेशियों का स्तर जितना कम होगा, उतना ज्यसदा शरीर में वसा होगी जो मधुमेह और हृदय रोग जैसी अन्य गंभीर रोगों का भी कारण बनता है। उम्र बढऩे के साथ मांसपेशियों का कमजोर पडऩा भी कारण है। हमारे शरीर कि लगभग 70 प्रतिशत प्रतिरक्षा प्रणाली आंत के नीचे स्थित होती है, इसलिए रोग से लडऩे के लिए आंत को स्वस्थ रखना महत्वपूर्ण है। विटामिन ई भी एक लाभकारी एंटी-एजिंग ऑक्सीडेंट है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
असंतुलित शुगर बढ़ाती उम्र
शरीर में असंतुलित ब्लड शुगर हमारी ऊर्जा और मनोदशा में गिरावट का कारण बनती है। इससे अनिद्रा और उम्र बढऩे की गति में तेजी भी आती है। मधुमेह भी हो सकता है जो खुद ही कई बीमारियों का गढ़ है। इसलिए प्रोसेस्ड फूड और शुगर युक्त खान-पान से बचें। शरीर में शुगर लेवल बढऩे से शारीरिक रसायन और हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जो हमारी उम्र पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इतना ही नहीं नकारात्मक विचार और तनाव भी हमारे हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर स्वास्थ्य को कमजोर करते हैं। जबकि सकारात्मक विचार खुश रखने वाले हार्मोन और सकारात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।

from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2TYHoSS
No comments:
Post a Comment