जयपुर.
कोरोनावायरस को लेकर जितना डर है उतना ही भ्रम भी। आइए जानते हैं कोरोनावायरस (कोविड-19) को लेकर ऐसे कुछ मिथकों के बारे में। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी भी जारी की है कि भरोसा करने से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को सत्यापित कर लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया पर फैलाई ऐसे ही कुछ मिथकों को खारिज किया है।
1. हैंड ड्रायर कोरोना वायरस को नहीं मार सकता: वायरस को खत्म करने के लिए हैंड ड्रायर्स कारगर नहीं हैं। डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि अपने हाथों को अल्कोहल आधारित हैंड रब से धोएं या उन्हें साबुन और पानी से साफ करें। अच्छे से धोने के बाद उन्हें पेपर टावल या ड्रायर से सुखा लें।
2. यूवी लैंप का प्रयोग नहीं करें : यूवी अथवा अल्ट्रावायलेट लैंप्स आपके हाथों को स्टर्लाइज करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यूवी विकिरण त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।
3. थर्मल स्कैनर हमेशा वायरस का पता नहीं लगाते: थर्मल स्कैनर उन लोगों के लिए प्रभावी है, जिनमें कोरोनावायरस के संक्रमण से कारण बुखार आया है। ये उन लोगों में वायरस का पता नहीं लगा सकता, जिनमें संक्रमित होने के बावजूद बुखार नहीं आया। ऐसा इसलिए क्योंकि संक्रमित होने के दो से दस दिन बार बुखार के लक्षण नजर आते हैं।
4. अल्कोहल या क्लोरीन का छिडक़ाव करने से वायरस नहीं मरता: ये भी एक भ्रम है कि संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर क्लोरीन या अल्कोहल का छिडक़ाव करने से कोरोनावायस खत्म हो जाता है। पहले से प्रवेश कर चुके विषाणु ऐसे खत्म नहीं होते, बल्कि इससे आंख और मुंह के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
5. युवा जल्दी संक्रमित हो सकते हैं: कोरोनावायस सभी उम्र के लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि पुराने रोगी, अस्थमा, मधुमेह और हृदय रोगियों पर इसका असर तेज होता है। डब्ल्यूएचओ सभी उम्र के लोगों को स्वच्छ हाथों और स्वच्छ वातावरण के साथ इससे बचाव की हिदायत देता है।
6. एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं : एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करते, ये केवल बैक्टीरिया पर असर करते हैं। चूंकि कोरोनावायरस एक वायरल संक्रमण है इसलिए इसके बचाव और रोकथाम के लिए एंटीबायोटिक्स का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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