Epilepsy: आपने कई बार कुछ लोगों को मिर्गी का दौरा पड़ते देखा होगा। क्या आप जानते हैं क्या होता मिर्गी रोग, यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मिर्गी पीड़ित मरीज के दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होने लगती है। और मस्तिष्क की यह गड़बड़ी व्यक्ति में बार-बार दौरे पड़ने का कारण बनती है। अत्यधिक मिर्गी के दौरे व्यक्ति केि दिमागी संतुलन का पूरी तरह से खराब कर देते हैं। और उसके साथ ही शरीर का बैलेंस भी खराब हो जाता है, व्यक्ति लड़खड़ाने लगता है।
मिर्गी शरीर के किसी भी हिस्से चेहरे, हाथ या पैर को प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षणों में बेहोशी आना, गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार मिर्गी रोग चार तरह से बांटा जा सकता है। आइए जानते हैं मिर्गी के प्रकार, लक्षण और बचाव के तरीकों के बार में
मिर्गी के प्रकार
Generalized Epilepsy: इस तरह का दौरा तब पड़ता है जब मरीज के पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह दौरा सबसे कॉमन माना जाता है।
Absence Seizures: इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।
Complex Partial Seizures: इसके लक्षण भी कुछ-कुछ एब्सेंस सीजर की तरह ही होते हैं।
Partial (focal) Epilepsy: इस दौरे में रोगी के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ही मिर्गी की गतिविधि होती है। इस अवस्था में करंट शरीर के एक हिस्से से निकलकर उसी हिस्से में बना रहता है। उदाहरण आंख में , दिमाग में हो सकता है।
मिर्गी के लक्षण-
- आंखों के आगे अंधेरा छा जाना
- शरीर का अकड़ जाना
- मुंह से झाग आना
- अचानक गिर जाना
- बेहोश हो जाना
- आंखों की पुतलियों का ऊपर की तरफ खिंचना
- हाथ या पैर का लगातार चलना या झटके से लगना
- होंठ या जीभ काट लेना
मिर्गी के दौरान अपनाएं बचाव के ये उपाय-
- साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनकर रखें।
- तेज चमकती रोशनी से बचें।
- तनाव से दूर रहें।
- कोशिश करें कि टीवी और कंप्यूटर के आगे ज्यादा देर तक न बैठें।
- पर्याप्त नींद लेना।
- अल्कोहल या नशीली दवाओं का अधिक सेवन करने से बचें।
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